सूखे और कमजोर मॉनसून का असर: चीनी-प्याज के दाम बढ़े, रसोई का बजट बिगड़ा
बेंगलुरु। राज्य में भीषण सूखे और मॉनसून की कमजोर बारिश का असर अब आम लोगों की रसोई पर दिखाई देने लगा है। बारिश की कमी के कारण कृषि उत्पादन और आपूर्ति पर दबाव बढ़ने से बाजार में प्याज और चीनी की कीमतों में तेजी आई है। पिछले कुछ सप्ताह में प्याज के थोक भाव में औसतन करीब 15 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। वहीं राजधानी बेंगलुरु के खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 20-30 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 40-52 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अचानक बढ़ी कीमतों से उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
व्यापारियों के अनुसार, प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मॉनसून की बारिश में कमी है। पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण प्याज की बुआई प्रभावित हुई है। बारिश में देरी से कई इलाकों में किसानों को फसल की बुआई धीमी करनी पड़ी, जबकि जहां फसल लगाई गई, वहां भी मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। महाराष्ट्र कर्नाटक समेत कई राज्यों के लिए प्याज की आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में वहां उत्पादन प्रभावित होने का सीधा असर दूसरे राज्यों के बाजारों पर भी पड़ रहा है।
बेंगलुरु के खुदरा बाजार में प्याज की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने ग्राहकों को परेशान कर दिया है। कुछ सप्ताह पहले तक 20 से 30 रुपये किलो में मिलने वाला प्याज अब कई खुदरा बाजारों में 40 से 52 रुपये किलो तक बिक रहा है। कीमतों में यह उछाल कम समय में हुआ है, जिसके कारण रोजमर्रा की खरीदारी करने वाले परिवारों को अपने खर्च में बदलाव करना पड़ रहा है। प्याज भारतीय रसोई में लगभग हर दिन इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल है, इसलिए इसके दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है।
थोक बाजार में भी प्याज की कीमत लगातार ऊपर जा रही है। आपूर्ति में कमी और भविष्य में उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण व्यापारियों के बीच कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि नई फसल की आवक समय पर नहीं हुई तो आने वाले दिनों में प्याज के दाम पर दबाव बना रह सकता है।
मॉनसून की कमजोर स्थिति केवल प्याज तक सीमित नहीं है। बारिश की कमी से कई कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण बुआई और फसल की वृद्धि दोनों पर असर पड़ सकता है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने की स्थिति में सिंचाई पर निर्भरता बढ़ती है और किसानों की लागत भी बढ़ सकती है। इसका प्रभाव अंततः कृषि उपज की कीमतों पर पड़ सकता है।
इसी बीच चीनी के थोक भाव में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग कमिटी (APMC) के सलाहकार रमेश चंद्र लाहोटी के अनुसार, अगस्त के दौरान चीनी की थोक कीमत लगातार बढ़ी है। उन्होंने बताया कि चीनी का भाव पहले करीब 45 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 63 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कम समय में कीमत में हुई