कर्नाटक

कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी गोलीकांड में नया मोड़, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

Kavita2
26 Aug 2026 10:12 AM IST
कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी गोलीकांड में नया मोड़, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
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चामराजनगर। कर्नाटक के चामराजनगर जिले के हनूर तालुक स्थित कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में 15 अगस्त को हुई गोलीबारी की घटना ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। घटना में मारे गए तीन लोगों में से कम से कम दो को बेहद नजदीक से गोली मारे जाने की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद वन विभाग की ओर से घटना के शुरुआती चरण में दिए गए बयानों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि आखिर गोलीबारी किन परिस्थितियों में हुई और मृतकों को किस दूरी से निशाना बनाया गया।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में शामिल सेबेस्टियन डेविड कुमार, उम्र 36 वर्ष, और एंथनीस्वामी पी., उम्र 50 वर्ष, को बहुत पास से शॉटगन से गोली मारी गई थी। रिपोर्ट में दोनों की मौत का कारण अत्यधिक रक्तस्राव और गोली लगने से आई चोटों के कारण हुआ शॉक बताया गया है। यह निष्कर्ष घटना के स्वरूप को लेकर जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में सामने आया है।

15 अगस्त को कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा के पास कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के अंदर वन अधिकारियों द्वारा की गई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान सेबेस्टियन डेविड कुमार, एंथनीस्वामी पी. और जॉन रोज पीटर, उम्र 42 वर्ष, के रूप में हुई थी। इनके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति महिमा दास घटनास्थल से भाग निकलने में सफल रहा था। घटना के बाद वन विभाग की ओर से इसे लेकर शुरुआती तौर पर जो जानकारी दी गई थी, अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के निष्कर्षों के बाद उस पर नए सिरे से सवाल उठ रहे हैं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दो मृतकों को नजदीक से गोली मारे जाने की बात सामने आना जांच के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गोली चलने की दूरी किसी भी फायरिंग घटना के घटनाक्रम को समझने में अहम भूमिका निभाती है। इससे जांचकर्ता यह निर्धारित करने की कोशिश कर सकते हैं कि गोलीबारी किस परिस्थिति में हुई, मृतक और गोली चलाने वाले व्यक्ति के बीच अनुमानित दूरी कितनी थी और घटनास्थल पर उस समय दोनों पक्षों की स्थिति क्या थी।

रिपोर्ट के निष्कर्षों के बाद अब जांच एजेंसियां घटनास्थल के भौतिक साक्ष्यों की भी नए सिरे से पड़ताल कर सकती हैं। गोली लगने के निशान, हथियारों की स्थिति, कारतूस और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का मिलान किया जाना महत्वपूर्ण होगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ था।

घटना के बाद वन विभाग के शुरुआती बयानों और अब सामने आए चिकित्सकीय निष्कर्षों के बीच अंतर जांच को और जटिल बना रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट किसी व्यक्ति की मौत के कारण और चोटों की प्रकृति को वैज्ञानिक आधार पर दर्ज करती है। ऐसे में नजदीक से गोली मारे जाने की पुष्टि मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखी जा रही है।

जांचकर्ताओं के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू घटनास्थल पर मौजूद चौथे व्यक्ति महिमा दास का बयान भी हो सकता है। घटना के दौरान वह वहां मौजूद था और बाद में मौके से भाग निकला। यदि जांच एजेंसियां उसका पता लगाकर बयान दर्ज करती हैं, तो गोलीबारी से पहले और उसके दौरान हुई घटनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। वह मृतकों और वन अधिकारियों के बीच हुई बातचीत, गोलीबारी की शुरुआत तथा घटना के बाद की परिस्थितियों को लेकर संभावित प्रत्यक्ष जानकारी दे सकता है।

कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में हुई यह घटना वन विभाग की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े करती है। वन्यजीव अभयारण्य में अधिकारियों और आम लोगों के बीच किसी विवाद या मुठभेड़ की स्थिति में हथियारों के इस्तेमाल की परिस्थितियां बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे मामलों में यह निर्धारित करना जरूरी होता है कि बल प्रयोग आवश्यक था या नहीं और गोली चलाने की स्थिति कैसे बनी।

अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों के सामने घटना की पूरी कड़ी को दोबारा जोड़ने की चुनौती है। मृतकों को लगी चोटों का विवरण, गोली लगने की दिशा और दूरी तथा मौके से मिले अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा सकता है। इसके अलावा वन अधिकारियों के बयानों और अन्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष गवाहों के कथनों का भी चिकित्सकीय निष्कर्षों से मिलान जरूरी होगा।

मामले में मृतकों के परिवारों की ओर से भी न्याय और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठने की संभावना है। तीन लोगों की मौत से जुड़े इस मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने जांच के कई पहलुओं को महत्वपूर्ण बना दिया है। खासतौर पर दो लोगों को बेहद नजदीक से गोली लगने की पुष्टि के बाद घटना के शुरुआती विवरण की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल जांच एजेंसियां पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखते हुए आगे की कार्रवाई कर सकती हैं। घटनास्थल से मिले सबूतों, हथियारों और कारतूसों की फोरेंसिक जांच तथा संबंधित अधिकारियों और संभावित गवाहों के बयान मामले की दिशा तय करने में अहम होंगे।

कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी गोलीकांड में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि उनके साथ मौजूद महिमा दास घटना के बाद से फरार है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने कम से कम दो मृतकों को बहुत पास से गोली मारे जाने की जानकारी देकर मामले की जांच को नया मोड़ दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गोलीबारी की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और क्या शुरुआती तौर पर घटना को जिस तरह बताया गया था, वह तथ्यों से मेल खाता है। जांच एजेंसियों के सामने इन सवालों का जवाब तलाशना सबसे बड़ी चुनौती है।

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