मानीमऊ। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नदी का पानी लगातार बढ़ने से कई गांवों में बाढ़ की स्थिति बनने लगी है। कासिमपुर गांव का संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जबकि कासिमपुर और बख्सीपुर्वा गांव में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है।

बाढ़ की आशंका को देखते हुए ग्रामीण अपने घरों से निकलकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने लगे हैं। कई परिवार अपनी गृहस्थी का सामान भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं। इसके लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। रास्तों पर पानी भर जाने के कारण आवागमन प्रभावित हो गया है। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बुधवार सुबह करीब आठ बजे गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से महज 21 सेंटीमीटर नीचे दर्ज किया गया। जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन और ग्रामीण दोनों सतर्क हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि नरौरा बांध से तीन दिन के अंदर दूसरी बार पानी छोड़ा गया है। इसके चलते गंगा के जलस्तर पर इसका असर आने वाले दिनों में दिखाई देने की संभावना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि छोड़े गए पानी का प्रभाव शुक्रवार सुबह तक तटीय क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।

गंगा किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ के समय उन्हें ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पानी बढ़ने के साथ ही खेतों, रास्तों और घरों तक खतरा पहुंचने लगता है।

कासिमपुर गांव का मुख्य मार्ग पानी में डूब जाने से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। कई लोग जरूरी कामों के लिए नाव से आने-जाने को मजबूर हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चिंता घर के सामान और पशुओं को सुरक्षित रखने की होती है। लोग अनाज, कपड़े, जरूरी दस्तावेज और अन्य सामान को नावों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।

बख्सीपुर्वा गांव में भी बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने सतर्कता बढ़ा दी है। कई परिवारों ने सुरक्षित जगहों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें।

स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते राहत और बचाव की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए, ताकि आपात स्थिति में लोगों को परेशानी न हो। ग्रामीणों ने प्रशासन से नावों की संख्या बढ़ाने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

बाढ़ का असर किसानों पर भी पड़ने की आशंका है। गंगा के किनारे स्थित खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हो सकता है। किसानों का कहना है कि यदि पानी ज्यादा समय तक रुका रहा तो कृषि कार्य प्रभावित होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों के जलस्तर में वृद्धि के दौरान तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच चुका है और ग्रामीण इलाकों में चिंता बनी हुई है। नरौरा बांध से छोड़े गए पानी का असर आने वाले दिनों में कितना होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

तटीय गांवों के लोग अब प्रशासन से राहत और सुरक्षा की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं, जलस्तर बढ़ने की स्थिति में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

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