लखनऊ। नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने पोषण और बाल विकास को लेकर सरकार की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास का मजबूत केंद्र बनाना है।

मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शुरुआती शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी बहनों के कंधों पर बच्चों के बेहतर भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी है। वे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास पर ध्यान देकर विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार करने में योगदान दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि बच्चों, महिलाओं और परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक करने का एक व्यापक प्रयास है। इसके माध्यम से समाज में पोषण के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाने का काम किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों को जमीन पर उतारा जा रहा है। इनमें बच्चों के लिए हॉट कुक्ड मील, सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही, पोषण के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसे प्रमुख कार्यक्रम शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण और शिक्षा का विशेष महत्व होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बेबी रानी मौर्य ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों के लिए किताबें और खिलौने उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे खेल-खेल में सीख सकें और उनकी रचनात्मक क्षमता का विकास हो सके।

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास किसी भी बच्चे के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। जीवन के शुरुआती वर्षों में मिलने वाला सही पोषण और बेहतर वातावरण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को मजबूत बनाता है।

मंत्री ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं और माताओं के स्वास्थ्य की चिंता की जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

उन्होंने कहा कि पोषण अभियान में केवल सरकारी विभागों की भूमिका ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समुदाय की भागीदारी भी जरूरी है। जब परिवार, समाज और आंगनबाड़ी केंद्र मिलकर काम करेंगे, तभी कुपोषण जैसी समस्याओं को प्रभावी रूप से दूर किया जा सकेगा।

राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें पोषण से जुड़े संदेशों का प्रचार, स्वास्थ्य जांच, महिलाओं और बच्चों के लिए जागरूकता गतिविधियां और समुदाय को जोड़ने के प्रयास शामिल होंगे।

मंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे दूर-दराज के क्षेत्रों तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं। ग्रामीण और कमजोर वर्ग के परिवारों तक पोषण संबंधी सेवाएं पहुंचाने में उनकी भूमिका बेहद अहम है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बनाना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ इस वर्ष पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है, ताकि लोग आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ें और बच्चों के पोषण में अपनी भूमिका निभाएं।

राष्ट्रीय पोषण माह के जरिए सरकार का लक्ष्य कुपोषण को कम करना, महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाना और पोषण के प्रति लोगों की सोच में बदलाव लाना है। मंत्री ने सभी लोगों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चे ही देश के भविष्य की मजबूत नींव हैं। इसलिए बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। आंगनबाड़ी केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और आने वाले समय में इन्हें और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

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