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- 10 किलो सोना तस्करी...

लखनऊ। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर ब्रेजा कार से 10.026 किलो सोना बरामद होने के मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई अभी पूरी नहीं हो सकी है। घटना के 20 दिन बाद भी दो प्रमुख आरोपी जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर हैं। कार को नेपाल ले जाने वाले चालक अभिषेक और महराजगंज जिले के ठूठीबारी निवासी रियाज की गिरफ्तारी नहीं होने से सोना तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच अभी निर्णायक चरण तक नहीं पहुंच पाई है।
जानकारी के अनुसार, 21 अगस्त की रात आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर जांच के दौरान एक ब्रेजा कार से भारी मात्रा में सोना बरामद किया गया था। जांच में कार से 10.026 किलो सोना मिलने के बाद सुरक्षा और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई थीं। बरामद सोने की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
मामले की जांच कस्टम विभाग समेत अन्य एजेंसियां कर रही हैं। पूछताछ और प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिसके बाद चालक अभिषेक और रियाज की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है। हालांकि, दोनों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सोना तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाना है। अधिकारियों का मानना है कि बरामद सोना किसी बड़े तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कस्टम विभाग की पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सोना कहां से आया था, इसे कहां पहुंचाया जाना था और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इस मामले के तार अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
जांच में सामने आया है कि बरामद सोने को नेपाल ले जाने की तैयारी थी। इसी वजह से चालक अभिषेक और रियाज की भूमिका अहम मानी जा रही है। एजेंसियां दोनों से पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ना चाहती हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियां संभावित ठिकानों पर दबिश देने और आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही दोनों आरोपियों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सोना तस्करी के मामलों में अक्सर कई स्तरों पर लोग जुड़े होते हैं। इसमें सोना उपलब्ध कराने वाले, परिवहन करने वाले और अंतिम खरीदार तक पूरा नेटवर्क काम करता है। ऐसे में जांच एजेंसियों की कोशिश केवल बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे गिरोह की पहचान करना है।
घटना के बाद से ही जांच एजेंसियों ने कार से जुड़े दस्तावेजों, यात्रा मार्ग और संपर्कों की जांच शुरू कर दी थी। इसके अलावा आरोपियों के संभावित संपर्कों और आर्थिक लेन-देन की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
मामले में अभी तक कुछ लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन मुख्य कड़ी माने जा रहे अभिषेक और रियाज के नहीं मिलने से जांच आगे बढ़ाने में परेशानी आ रही है। एजेंसियां मान रही हैं कि दोनों की गिरफ्तारी से तस्करी के नेटवर्क के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।
जानकारों के अनुसार, भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में सोने की तस्करी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में तस्कर अलग-अलग रास्तों और तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुई यह बरामदगी भी इसी तरह के नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और इसके पीछे कौन लोग हैं।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और दोनों फरार आरोपियों की तलाश जारी है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद तस्करी नेटवर्क से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। वहीं, बरामद सोने के स्रोत और इसके अंतिम गंतव्य का पता लगाना भी जांच का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।





