भूतपुरी। लगातार हुई तेज बारिश ने एक बार फिर पुराने पुल की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र से गुजर रही बनैली नदी पर बने पुराने पुल की एक साइड की एप्रोच बुधवार को फिर से धंस गई। एप्रोच के पास कई फीट गहरा गड्ढा बन गया है, जबकि सड़क के नीचे की मिट्टी खिसकने से करीब पांच फीट हिस्सा नीचे बैठ गया है। इससे पुल से गुजरने वाले लोगों में हादसे का डर बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, तीन दिन पहले हुई लगातार तेज बारिश के बाद पुल की एप्रोच में नुकसान पहुंचा। बुधवार को स्थिति और खराब हो गई, जब पुल के एक हिस्से की एप्रोच धंस गई। सड़क के नीचे की मिट्टी बहने के कारण वहां बड़ा गड्ढा बन गया है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पहले से ही जर्जर हालत में था। बारिश के कारण इसकी स्थिति और खराब हो गई है। पुल से गुजरने वाले वाहन चालकों को अब काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है। रात के समय यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि गड्ढा दिखाई नहीं देने पर दुर्घटना हो सकती है।
बताया जा रहा है कि यह पुल कई दशक पुराना है। पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण कुछ माह पहले इस पर आवाजाही बंद कर दी गई थी। प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए पुल के रास्ते को सीमेंटेड ब्लॉक लगाकर बंद किया था।
हालांकि, कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की सुविधा को देखते हुए जिलाधिकारी के आदेश पर पुराने पुल को दोबारा खोल दिया गया था। उत्तराखंड के जसपुर, काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले शिवभक्तों को परेशानी न हो, इसके लिए पुल से आवागमन शुरू कराया गया था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल के पास नए पुल का निर्माण कार्य भी शुरू किया गया था, लेकिन बारिश के कारण फिलहाल निर्माण कार्य बंद पड़ा हुआ है। ऐसे में पुराने पुल पर ही लोगों की निर्भरता बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुराने पुल की स्थिति पहले से खराब थी और अब एप्रोच धंसने के बाद यहां से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल मरम्मत कार्य कराने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
लोगों ने बताया कि बारिश के दौरान नदी में पानी का दबाव बढ़ जाता है, जिससे पुल और सड़क के आसपास की मिट्टी कमजोर हो जाती है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो एप्रोच का और हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।
प्रशासन की ओर से पुल की स्थिति का निरीक्षण किए जाने की संभावना है। अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन किया जा सकता है और इसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जब तक नया पुल तैयार नहीं हो जाता, तब तक पुराने पुल की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि केवल अस्थायी व्यवस्था से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थायी समाधान जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल क्षेत्र के कई गांवों और आसपास के इलाकों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके बंद होने से लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ सकता है। वहीं, खराब स्थिति में खुले पुल से आवागमन करना भी खतरे से खाली नहीं है।
फिलहाल पुल की एप्रोच धंसने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखना और पुल की स्थिति को जल्द सुधारना है।
बारिश के बाद सामने आई इस समस्या ने एक बार फिर पुराने पुलों की सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा, ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।