आजमगढ़ :  समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने शुक्रवार को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी 2022 से ही चुनावी प्रक्रियाओं और आयोग के कुछ फैसलों को लेकर लगातार अपनी चिंताएं सामने रखती रही है। यादव ने दावा किया कि हाल में सामने आए घटनाक्रम से पहले उठाए गए सवालों को और बल मिला है।
धर्मेंद्र यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं, वे उनके अनुसार पूरी तरह जायज हैं। उन्होंने आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अधिकारियों के अधिकारों को लेकर आपत्ति जताई।
यादव ने कहा, “हम 2022 से और उससे भी पहले से लगातार ये सवाल उठा रहे हैं, और ये पूरी तरह से जायज सवाल हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की ओर से तैयार किए गए कुछ नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद सामने आए थे।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों ने Form 6 और मतदाता सूची प्रबंधन से जुड़े कुछ पहलुओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग विचार उसकी आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा थे और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
धर्मेंद्र यादव ने विशेष रूप से Form 6 में किए गए बदलाव का मुद्दा उठाया। Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि इसमें किया गया बदलाव कानून और संविधान के अनुरूप नहीं था।
उन्होंने कहा, “‘Form 6’ में किया गया बदलाव न तो कानून के मुताबिक था और न ही संविधान के।” यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब Form 6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा को लेकर चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों पर सार्वजनिक चर्चा हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने ऑनलाइन Form 6 में SIR से संबंधित घोषणा जोड़े जाने पर आपत्ति जताई थी। बाद में उन राज्यों में यह अतिरिक्त घोषणा हटाई गई, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
हालांकि चुनाव आयोग ने मतभेदों को लेकर सामने आए दावों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि आयोग के अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग के अनुसार, सदस्यों की ओर से अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां देना निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR से संबंधित आदेशों को तीनों सदस्यों की मंजूरी मिली थी।
धर्मेंद्र यादव ने मतदाता सूची में बदलाव के खिलाफ अपील से जुड़े अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि फील्ड स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों के अधिकारों में बदलाव कानूनी रूप से उचित नहीं था। उनके मुताबिक मतदाता सूची जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में निर्धारित कानूनी व्यवस्था का पालन होना चाहिए।
समाजवादी पार्टी सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली सीधे चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी हुई है। ऐसे में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या किसी बदलाव से संबंधित प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।
यादव के बयान का मुख्य केंद्र चुनाव आयोग के पिछले कुछ वर्षों के फैसले रहे। उन्होंने 2022 का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी तभी से इन मुद्दों को लगातार उठा रही है। उनका दावा है कि चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर उनकी ओर से पहले जताई गई चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं चुनाव आयोग ने हाल में मतदाता सूची से जुड़े अपने फैसलों और आंतरिक प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय सामने आना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया कि अंतिम फैसले बिना सहमति के लिए गए थे।
Form 6 से जुड़ा विवाद विशेष रूप से चर्चा में रहा है। सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने इसमें जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा को लेकर कानूनी और प्रक्रियात्मक आपत्तियां उठाई थीं। आयोग ने बाद में उन राज्यों में अतिरिक्त SIR घोषणा को हटाया जहां यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
धर्मेंद्र यादव ने अपने बयान में इन्हीं घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और मतदाता पंजीकरण से जुड़ी व्यवस्था में कोई भी बदलाव कानून और संविधान के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार होना चाहिए।
इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। विपक्षी नेताओं ने आयोग के कुछ निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए और आंतरिक टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से अलग करके देखा जाना चाहिए।
धर्मेंद्र यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन मुद्दों को आगे भी उठाती रहेगी। उनके मुताबिक चुनावी व्यवस्था में मतदाता के अधिकार सबसे महत्वपूर्ण हैं और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में कानून के अनुसार काम होना आवश्यक है।
इस तरह धर्मेंद्र यादव के बयान के बाद Form 6, मतदाता सूची और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक बहस एक बार फिर सामने आई है। एक ओर यादव ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा है कि अंतिम फैसलों पर तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति रही है।
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