सोनभद्र। किसानों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने बुधवार को जिले के कई विकास खंडों में प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।

राबर्ट्सगंज ब्लॉक परिसर में आयोजित प्रदर्शन का नेतृत्व भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष रामबहादुर सिंह ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी को संबोधित छह सूत्रीय ज्ञापन खंड विकास अधिकारी के माध्यम से सौंपा गया।

किसान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसानों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

जिलाध्यक्ष रामबहादुर सिंह ने कहा कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसान देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगातार कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान किए बिना कृषि क्षेत्र को मजबूत नहीं बनाया जा सकता।

प्रदर्शन के दौरान सबसे प्रमुख मांग विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि के मुआवजे को लेकर उठाई गई। किसान संघ ने मांग की कि किसानों की जमीन का मुआवजा बाजार मूल्य के आधार पर निर्धारित किया जाए, ताकि उन्हें उनकी भूमि का उचित मूल्य मिल सके।

किसान नेताओं ने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करते समय किसानों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं और भूमि अधिग्रहण के बाद उनके सामने आजीविका की समस्या भी खड़ी हो जाती है।

संगठन ने विस्थापित किसानों को अतिरिक्त राशि दिए जाने की भी मांग की। किसानों का कहना है कि जमीन जाने के बाद प्रभावित परिवारों को कई तरह की आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।

इसके अलावा निजी नलकूप, ट्यूबवेल और बगीचों के उचित मूल्यांकन की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई। किसान संघ ने कहा कि भूमि के साथ-साथ उस पर मौजूद संसाधनों का भी सही आकलन किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कई बार भूमि अधिग्रहण के दौरान केवल जमीन का मूल्य तय किया जाता है, जबकि किसान की वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए बगीचे, सिंचाई व्यवस्था और अन्य संसाधनों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है।

भारतीय किसान संघ के नेताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर संगठन लगातार आवाज उठाता रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ज्ञापन में शामिल सभी बिंदुओं पर जल्द कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कृषि से जुड़ी अन्य समस्याओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि खेती में बढ़ती लागत, संसाधनों की कमी और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

किसान संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो संगठन आगे भी आंदोलन करने को मजबूर होगा। हालांकि, संगठन ने प्रशासन से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की उम्मीद भी जताई।

ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। उन्होंने प्रशासन से किसानों के हित में निर्णय लेने की अपील की।

प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से प्राप्त ज्ञापन को स्वीकार करते हुए उनकी मांगों को संबंधित स्तर पर भेजने की बात कही है। अब किसानों की नजर प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

भारतीय किसान संघ का कहना है कि किसानों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। संगठन ने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इनकी कीमत किसानों के हितों की अनदेखी करके नहीं चुकाई जानी चाहिए।

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