Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश। वर्ष 2026 के पहले पूर्ण चंद्र ग्रहण के समाप्त होने के बाद, वाराणसी के विश्व प्रसिद्ध घाटों पर गंगा आरती का आयोजन किया गया। ग्रहण का समापन शाम 6:59 बजे हुआ, जिसके बाद लगभग एक घंटे की देरी के साथ आरती शुरू हुई।
घाटों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ जमा हुई, जिन्होंने धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार आरती में भाग लिया। आरती में पारंपरिक दीयों, भजन और मंत्रों के माध्यम से गंगा नदी की पूजा की गई। घाट प्रबंधन ने बताया कि ग्रहण के दौरान धार्मिक परंपरा के अनुसार आरती स्थगित रखी जाती है, ताकि अनुष्ठानों की पवित्रता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनी रहे।
श्रद्धालुओं ने कहा कि ग्रहण के बाद आरती में भाग लेकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद का अनुभव हुआ। घाटों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और भीड़ को व्यवस्थित तरीके से घाटों तक पहुँचाया गया।
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रहण के बाद आरती करना शुभ माना जाता है। यह परंपरा दर्शाती है कि प्रकृति और धर्म के सामंजस्य के बीच मानव जीवन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। वाराणसी के घाटों पर दीपों की रोशनी और गंगा नदी के पावन जल ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गंगा आरती में स्थानीय पुजारियों और सेवकों ने विधिपूर्वक पूजा अनुष्ठान संपन्न किए। श्रद्धालुओं ने दीप जलाए, आरती में भाग लिया और आशीर्वाद ग्रहण किया। यह धार्मिक आयोजन वाराणसी के घाटों की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ा गया।
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