गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में नगर निगम की ओर से राप्ती नदी के एकला बांध पर बनाई गई फोरलेन सड़क अब विवादों में घिर गई है। NHAI से अनुमति लिए बिना बनाई गई इस सड़क को फिलहाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सड़क पर फोरलेन बंद होने का बोर्ड लगा दिया गया है, जिसके बाद यहां पहुंचने वाले वाहन चालकों को वापस लौटना पड़ रहा है।
इस सड़क का उद्घाटन 23 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों कराया गया था। उद्घाटन के बाद कुछ समय तक इस पर आवागमन भी शुरू रहा, लेकिन अब सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रास्ता बंद कर दिया गया है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई इस सड़क के इस्तेमाल को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
हादसों के खतरे के बाद बंद कराया रास्ता
जानकारी के मुताबिक, यह फोरलेन सड़क जिस स्थान पर राष्ट्रीय राजमार्ग-27 से जुड़ती है, वह मार्ग बिहार, बंगाल और वाराणसी को जोड़ने वाला प्रमुख हाईवे है। यहां तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
NHAI अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति बनाए गए इस संपर्क मार्ग से वाहन सीधे हाईवे पर पहुंच रहे थे, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था। कुछ समय पहले हुए हादसों के बाद NHAI ने सख्त कदम उठाते हुए इस रास्ते को मिट्टी डालकर बंद करा दिया।
NHAI ने अनुमति नहीं लेने पर जताई आपत्ति
NHAI गोरखपुर के परियोजना प्रबंधक ललित पाल ने बताया कि संपर्क मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने के लिए विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
उन्होंने जिलाधिकारी दीपक मीना और नगर आयुक्त अजय जैन को पत्र भेजकर बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के किमी 263 पर बनाया गया यह कट सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं था। तेज गति से आने वाले वाहनों के सीधे हाईवे पर चढ़ने और मुड़ने से दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई थी।
NHAI के अनुसार, हाईवे पर किसी भी नए कट या कनेक्टिविटी के लिए तय नियमों के तहत अनुमति लेना जरूरी होता है।
हाई स्पीड कॉरिडोर पर बढ़ रहा था जोखिम
NHAI का कहना है कि गोरखपुर-वाराणसी-बिहार बाईपास एक हाई स्पीड कॉरिडोर है, जहां भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां पहले से रंबल स्ट्रिप, सोलर ब्लिंकर और चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
इसके बावजूद नए बने संपर्क मार्ग के कारण दुर्घटना की संभावना बढ़ रही थी। इसी वजह से NHAI ने फिलहाल इस रास्ते को बंद करने का फैसला लिया।
सर्विस लेन बनाने का विकल्प तलाशा जा रहा
अब इस समस्या के समाधान के लिए सर्विस लेन बनाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इसके लिए जमीन और बजट की जरूरत होगी। NHAI के नियमों के अनुसार हाईवे से जुड़ने वाले रास्तों को निर्धारित मानकों के अनुसार ही तैयार किया जा सकता है।
करीब तीन किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण में काफी धन खर्च हुआ है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि इसे नियमों के तहत कैसे उपयोग में लाया जाए।
नगर निगम ने बातचीत से समाधान का दिया भरोसा
नगर आयुक्त अजय जैन ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल आवागमन बंद किया गया है। उन्होंने बताया कि रिंग रोड के अगले हिस्से को चौड़ा करने के लिए 12 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि सड़क पर पाथवे, डिवाइडर, लाइटिंग और पौधरोपण जैसे कार्य भी किए गए हैं। NHAI की आपत्ति के बाद अब नियमों के अनुसार समाधान निकालने के लिए बातचीत की जा रही है।
नगर निगम का कहना है कि कोशिश है कि इस सड़क का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल हो सके, जिससे शहर में यातायात दबाव कम करने में मदद मिले।
करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल
फिलहाल यह सड़क बंद है और लोग यहां पहुंचकर वापस लौट रहे हैं। उद्घाटन के कुछ समय बाद ही रास्ता बंद होने से परियोजना की योजना और अनुमति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब देखना होगा कि NHAI और नगर निगम के बीच बातचीत के बाद इस सड़क को दोबारा कब और किस व्यवस्था के तहत शुरू किया जाता है।