अयोध्या: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने लगी हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) के संगठनात्मक ढांचे को लेकर अयोध्या में स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। चुनावी माहौल बनने के बावजूद सपा की जिला और महानगर कमेटियों का गठन अब तक नहीं हो सका है।

संगठन के पुनर्गठन को लेकर स्थानीय स्तर के कई प्रमुख नेताओं से बातचीत की गई, लेकिन किसी ने भी इस मामले में स्पष्ट पहल की जिम्मेदारी लेने से परहेज किया। अधिकांश नेताओं ने इसे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के स्तर का निर्णय बताते हुए अपना पक्ष रखने से दूरी बनाई।

जिला और महानगर कमेटी के गठन में देरी

सपा की जिला और महानगर कमेटी लंबे समय से भंग है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच संगठन की नई संरचना को लेकर इंतजार बना हुआ है।

राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने और विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच संगठन का सक्रिय होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक नई कमेटियों के गठन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

प्रदेश कमेटी ने किया था भंग करने का आदेश

जानकारी के अनुसार, प्रदेश कमेटी की ओर से पिछले वर्ष 11 दिसंबर को अयोध्या की जिला और महानगर कमेटी को भंग करने का आदेश जारी किया गया था।

यह आदेश तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की ओर से जारी किया गया था। हालांकि, कमेटी भंग करने के पीछे किसी विशेष कारण का सार्वजनिक रूप से उल्लेख नहीं किया गया था।

इसके बाद से नई कमेटी के गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

स्थानीय नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पर छोड़ी जिम्मेदारी

संगठन गठन को लेकर जब स्थानीय नेताओं से बात की गई तो उन्होंने इसे राष्ट्रीय नेतृत्व का फैसला बताया।

सांसद अवधेश प्रसाद, पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय पवन और पूर्व मंत्री आनंदसेन यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं से जुड़े लोगों का कहना है कि जिला और महानगर कमेटी के गठन का निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के स्तर से होना है।

नेताओं के इस रुख के बाद स्थानीय स्तर पर संगठन विस्तार को लेकर स्थिति अभी भी असमंजस में बनी हुई है।

कार्यकर्ताओं में बढ़ रहा इंतजार

सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनावी तैयारियों के लिए मजबूत संगठन जरूरी है। बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने के लिए जल्द कमेटियों का गठन होना चाहिए।

कार्यकर्ताओं के अनुसार, संगठन की अनुपस्थिति में कई गतिविधियों को संचालित करने में परेशानी आ रही है।

चुनावी तैयारी पर असर की चर्चा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले सभी दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुट जाते हैं। ऐसे समय में जिला और महानगर स्तर पर कमेटियों का गठन अहम भूमिका निभाता है।

सपा के लिए अयोध्या राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में संगठनात्मक ढांचे को जल्द सक्रिय करना पार्टी के लिए जरूरी हो सकता है।

सपा के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती

अयोध्या में सपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं, लेकिन संगठन के पुनर्गठन को लेकर स्पष्ट जिम्मेदारी सामने नहीं आ रही है।

पार्टी नेतृत्व की ओर से नई कमेटियों के गठन को लेकर फैसला आने के बाद ही स्थिति साफ होगी। फिलहाल जिला और महानगर संगठन में नई नियुक्तियों का इंतजार जारी है।

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटने लगे हैं। ऐसे में सपा की संगठनात्मक गतिविधियों पर भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से कमेटियों के गठन को लेकर निर्णय लिए जाने की संभावना है।

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