बिजनौर। चीनी की कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सरकार ने सितंबर माह के दूसरे पखवाड़े का चीनी बिक्री कोटा जारी कर दिया है। नए कोटे के तहत चीनी मिलों को अगले 15 दिनों में 3.26 लाख क्विंटल चीनी बेचने की अनुमति दी गई है। इससे पहले सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए मिलों को 2.99 लाख क्विंटल चीनी बिक्री का कोटा आवंटित किया गया था।

सरकार की ओर से जारी नए कोटे के बाद अब चीनी मिलें निर्धारित मात्रा के अनुसार अपने खरीदारों के साथ बिक्री सौदे तय करेंगी। वहीं, चीनी के स्टाक और बिक्री व्यवस्था पर शासन स्तर से लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि बाजार में आपूर्ति बनी रहे और कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी को रोका जा सके।

15 दिन में तय मात्रा में करनी होगी बिक्री

चीनी मिलों को अब पहले की तरह पूरे महीने के लिए बिक्री कोटा नहीं दिया जा रहा है। सितंबर माह से सरकार ने कोटे की अवधि को घटाकर 15 दिन कर दिया है। इसके तहत हर पखवाड़े मिलों को अलग-अलग मात्रा में चीनी बेचने की अनुमति दी जा रही है।

नए नियमों के अनुसार कोई भी चीनी मिल निर्धारित कोटे से अधिक चीनी बाजार में नहीं बेच सकती है। इससे सरकार को चीनी की उपलब्धता, बिक्री और कीमतों पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।

पहले पखवाड़े में मिला था 2.99 लाख क्विंटल कोटा

सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए चीनी मिलों को 2.99 लाख क्विंटल चीनी बिक्री की अनुमति दी गई थी। अब दूसरे पखवाड़े में यह मात्रा बढ़ाकर 3.26 लाख क्विंटल कर दी गई है।

मिलों को नए कोटे के आधार पर अपने व्यापारिक समझौते और खरीदारों के साथ बिक्री प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बाजार की मांग और उपलब्ध स्टाक के आधार पर चीनी की आपूर्ति को व्यवस्थित किया जाएगा।

अगस्त में बढ़े थे चीनी के दाम

दरअसल, अगस्त महीने में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसके बाद केंद्र और प्रदेश सरकारों ने चीनी मिलों की बिक्री व्यवस्था और खरीदारों के स्टाक पर निगरानी बढ़ा दी थी।

सरकार की ओर से यह व्यवस्था की गई कि चीनी मिलें मनमाने तरीके से बड़ी मात्रा में बिक्री न कर सकें और बाजार में आपूर्ति संतुलित बनी रहे। इसी उद्देश्य से बिक्री कोटे और स्टाक की निगरानी को सख्त किया गया।

खरीदारों के स्टाक पर भी नजर

सरकार ने केवल मिलों की बिक्री पर ही नहीं, बल्कि चीनी खरीदारों के स्टाक पर भी निगरानी बढ़ाई है। थोक व्यापारियों और बड़े खरीदारों के पास उपलब्ध चीनी की मात्रा की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी पैदा न हो और उपभोक्ताओं को ऊंची कीमतों का सामना न करना पड़े।

कोटा व्यवस्था से बाजार नियंत्रण की कोशिश

चीनी उद्योग में सरकार लंबे समय से बिक्री कोटा प्रणाली लागू करती रही है। इसके तहत हर चीनी मिल को एक निश्चित मात्रा में चीनी बेचने की अनुमति दी जाती है। इससे उत्पादन, उपलब्धता और बाजार कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

पहले मिलों को एक महीने की अवधि के लिए बिक्री कोटा जारी किया जाता था, लेकिन सितंबर से इसे बदलकर 15 दिन कर दिया गया है। अब हर पखवाड़े बाजार की स्थिति के अनुसार कोटा तय किया जा रहा है।

मिलों को करना होगा नियमों का पालन

नए नियमों के तहत चीनी मिलों को निर्धारित कोटे के अनुसार ही बिक्री करनी होगी। अतिरिक्त बिक्री करने पर नियमों के उल्लंघन की स्थिति बन सकती है।

सरकार की निगरानी व्यवस्था के चलते मिलों को अपने स्टाक, बिक्री और खरीदारों से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना होगा। आने वाले दिनों में चीनी बाजार की स्थिति के आधार पर आगे के कोटे पर फैसला लिया जाएगा।

फिलहाल सितंबर के दूसरे पखवाड़े के लिए जारी 3.26 लाख क्विंटल के कोटे से बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। सरकार की नजर चीनी की कीमतों और उपलब्धता दोनों पर बनी हुई है।

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