राठ। जलालपुर मार्ग पर सरसई गांव के पास शनिवार को एक पटाखा गोदाम में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। हादसा उस समय हुआ जब गोदाम में काम कर रहे मजदूर पटाखे बनाने के लिए बारूद को धूप में सुखा रहे थे। अचानक बारूद में आग लग गई और देखते ही देखते लपटों ने गोदाम में रखे पटाखों और अन्य सामग्री को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। घटना के समय गोदाम में छह मजदूर काम कर रहे थे। आग भड़कते ही सभी जान बचाकर बाहर की ओर भागे। इस दौरान एक मजदूर के बाल झुलस गए, जबकि बाकी मजदूर सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।

आसपास रहने वाले लोगों ने आग की लपटें और मजदूरों की चीख-पुकार सुनी तो तत्काल मदद के लिए पहुंचे। लोगों ने सबमर्सिबल पंप चलाकर पानी की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। समय रहते आग बुझ जाने के कारण बड़ा हादसा टल गया।

घटना के बाद की गई जांच में गोदाम में क्षमता से अधिक पटाखे और बारूद रखे होने की बात सामने आई है। इससे सुरक्षा व्यवस्था और भंडारण के मानकों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

सुबह साढ़े 11 बजे हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक राठ कोतवाली क्षेत्र के पठानपुरा मोहल्ला निवासी सुधीर गुप्ता पुत्र आत्मप्रकाश ने सरसई रोड पर पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास आतिशबाजी का गोदाम बना रखा है।

शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे गोदाम में छह मजदूर पटाखे बनाने से जुड़ा काम कर रहे थे। इसी दौरान बारूद को धूप में सुखाया जा रहा था। अचानक बारूद में आग लग गई।

आग लगते ही वहां मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला। कुछ ही समय में आग की लपटें तेज हो गईं और गोदाम में रखे पटाखों तथा दूसरी सामग्री की ओर बढ़ने लगीं।

मजदूरों में मची भगदड़

गोदाम में आग लगते ही छह मजदूरों के बीच भगदड़ मच गई। सभी अपनी जान बचाने के लिए गोदाम से बाहर भागने लगे। इस दौरान एक मजदूर आग की चपेट में आ गया और उसके बाल झुलस गए।

हालांकि अन्य मजदूर समय रहते बाहर निकलने में कामयाब रहे। अगर मजदूरों को बाहर निकलने में कुछ और देर होती तो हादसा गंभीर रूप ले सकता था।

पटाखों और बारूद से भरे स्थान पर आग फैलने का खतरा अधिक होने के कारण आसपास के लोग भी घबरा गए। लोगों को डर था कि अगर आग अंदर रखे पूरे बारूद और पटाखों तक पहुंच गई तो तेज विस्फोट हो सकता है।

पड़ोसियों ने संभाला मोर्चा

घटना के बाद आसपास के लोगों की सक्रियता ने बड़ा हादसा टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आग की सूचना मिलते ही पड़ोसी मौके पर पहुंचे और उपलब्ध संसाधनों से आग बुझाने में जुट गए।

लोगों ने सबमर्सिबल पंप चलाया और पानी डालकर आग को आगे फैलने से रोकने की कोशिश की। लगातार प्रयास के बाद लपटों पर नियंत्रण पा लिया गया।

समय पर आग बुझने से गोदाम में मौजूद बड़ी मात्रा में पटाखों और बारूद तक आग पूरी तरह नहीं पहुंच सकी। इससे संभावित विस्फोट और बड़े नुकसान का खतरा टल गया।

गोदाम में क्षमता से अधिक सामग्री मिलने की बात

घटना के बाद जांच में गोदाम के अंदर क्षमता से अधिक पटाखे और बारूद पाए जाने की बात सामने आई है। यह तथ्य सामने आने के बाद गोदाम में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पटाखा निर्माण और बारूद के भंडारण में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। ऐसे स्थानों पर ज्वलनशील सामग्री की मात्रा, भंडारण की व्यवस्था और आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

जांच के दौरान अब यह भी देखा जा सकता है कि गोदाम में कितनी मात्रा में बारूद और तैयार पटाखे रखने की अनुमति थी और मौके पर वास्तव में कितनी सामग्री मौजूद थी।

धूप में सुखाया जा रहा था बारूद

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना की शुरुआत उस समय हुई जब मजदूर बारूद को धूप में सुखा रहे थे। इसी दौरान बारूद ने आग पकड़ ली।

बारूद में आग लगते ही स्थिति तेजी से बिगड़ी। आसपास पटाखों और अन्य ज्वलनशील सामग्री की मौजूदगी के कारण आग के तेजी से फैलने का खतरा पैदा हो गया।

गोदाम में मौजूद मजदूरों ने आग देखते ही काम छोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। इसी दौरान एक मजदूर के बाल झुलस गए।

बड़ा हादसा होने का था खतरा

जिस जगह आग लगी वहां बड़ी मात्रा में पटाखे और बारूद मौजूद होने की बात सामने आई है। ऐसे में आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

गोदाम के आसपास अन्य इमारतें और पॉलिटेक्निक कॉलेज भी है। इसलिए आग के बड़े रूप लेने पर आसपास के क्षेत्र के लिए भी खतरा पैदा हो सकता था।

स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण आग को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित कर लिया गया। इस वजह से किसी बड़े विस्फोट या जनहानि की सूचना नहीं है।

सुरक्षा इंतजामों की जांच जरूरी

घटना के बाद गोदाम में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि वहां आग बुझाने के पर्याप्त उपकरण मौजूद थे या नहीं और मजदूरों को आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम उपलब्ध कराए गए थे या नहीं।

इसके अलावा बारूद को धूप में सुखाने के दौरान किन सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था, यह भी जांच का विषय हो सकता है।

क्षमता से अधिक पटाखे और बारूद मिलने की जानकारी के बाद संबंधित अनुमति और भंडारण सीमा की जांच भी अहम हो गई है।

मजदूर बाल-बाल बचे

हादसे के दौरान सबसे बड़ी राहत यह रही कि गोदाम में मौजूद सभी छह मजदूर बाहर निकलने में सफल रहे। एक मजदूर के बाल झुलसे, लेकिन बाकी मजदूर आग की चपेट में आने से बच गए।

घटना के बाद मजदूरों और आसपास मौजूद लोगों में काफी देर तक दहशत का माहौल रहा। अचानक उठी आग की लपटों ने सभी को डरा दिया था।

फिलहाल इस घटना में बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन जिस तरह गोदाम में आग फैली और जांच में क्षमता से अधिक पटाखे व बारूद मिलने की बात सामने आई है, उससे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े हुए हैं।

शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे हुई इस घटना में पड़ोसियों की सक्रियता निर्णायक साबित हुई। सबमर्सिबल पंप से समय रहते आग बुझा दिए जाने से पटाखा गोदाम में संभावित बड़ा विस्फोट और गंभीर हादसा टल गया। अब जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि गोदाम में भंडारण और सुरक्षा से जुड़े नियमों का कितना पालन किया जा रहा था।

Tags: