बहजोई (संभल)। गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। चंदौसी के कारोबारी पवन कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि तकनीकी खामी के चलते उनके FASTag खाते से निर्धारित राशि से कई गुना अधिक टोल काट लिया गया। उनका कहना है कि 24 घंटे के भीतर वापसी यात्रा करने के बावजूद उनसे करीब 590 रुपये अतिरिक्त वसूल किए गए। पवन कुमार गुप्ता के अनुसार, बुधवार सुबह वह अपनी कार से गंगा एक्सप्रेसवे पर सफर के लिए निकले थे। सुबह करीब 9:04 बजे उन्होंने लहरावन टोल प्लाजा से एक्सप्रेसवे में प्रवेश किया। इसके बाद सुबह 9:44 बजे वह सिंभावली-मुरादपुर टोल प्लाजा से बाहर निकले। इस दौरान उनके FASTag से एक तरफ का निर्धारित टोल शुल्क 310 रुपये काटा गया।

इसके बाद रात में वह दिल्ली से वापस लौटे। वापसी के दौरान उन्होंने सिंभावली से गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रवेश किया और रात करीब 11:04 बजे लहरावन टोल प्लाजा से बाहर निकले। इस बार उनके FASTag खाते से 400 रुपये काट लिए गए। कारोबारी का आरोप है कि टोल नियमों के अनुसार यदि कोई वाहन 24 घंटे के भीतर उसी मार्ग से वापस लौटता है तो उसे रिटर्न यात्रा पर छूट मिलती है। इस हिसाब से उनकी पूरी यात्रा का कुल टोल करीब 465 रुपये बनना चाहिए था। वापसी के समय उनसे केवल 155 रुपये अतिरिक्त टोल लिया जाना था, लेकिन सिस्टम की गलती के कारण उनसे 400 रुपये वसूल कर लिए गए।

उन्होंने बताया कि पहली यात्रा में 310 रुपये और वापसी यात्रा में 400 रुपये मिलाकर उनके FASTag से कुल 710 रुपये कटने चाहिए थे, लेकिन नियमों के अनुसार मिलने वाली छूट को जोड़ने पर वास्तविक भुगतान करीब 465 रुपये होना था। इस तरह उनसे कुल 1055 रुपये वसूल किए गए, जो तय राशि से करीब 590 रुपये अधिक है। पवन कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया कि FASTag सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी या टोल प्रबंधन की लापरवाही के कारण यह समस्या सामने आई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस करने की मांग की है।

गौरतलब है कि FASTag व्यवस्था का उद्देश्य टोल प्लाजा पर समय की बचत और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करना है। लेकिन यदि तकनीकी खामियों के कारण गलत राशि कटती है तो वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गंगा एक्सप्रेसवे पर सामने आए इस मामले ने टोल सिस्टम की निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।

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