कटिहार। पूर्व मध्य रेलवे के सोनपुर रेल मंडल अंतर्गत कटिहार-बरौनी रेलखंड पर शुक्रवार सुबह बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। सेमापुर रेलवे स्टेशन के यार्ड क्षेत्र में पटरी टूटने के बावजूद ट्रेन संख्या 15904 एक्सप्रेस का इंजन और उसके पीछे की एक बोगी क्षतिग्रस्त ट्रैक से गुजर गई। खतरे का आभास होते ही लोको पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए ट्रेन रोक दी। समय रहते उठाए गए इस कदम से ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्रियों की जान बच गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे हुई। ट्रेन जैसे ही सेमापुर रेलवे स्टेशन के यार्ड क्षेत्र में दाखिल हुई तभी ट्रैक में गंभीर फ्रैक्चर मौजूद था। ट्रेन का इंजन और उसके ठीक पीछे वाली एक बोगी टूटी हुई पटरी को पार कर चुकी थी। इसी दौरान लोको पायलट को ट्रैक में गड़बड़ी का आभास हुआ। उन्होंने तत्काल सावधानी बरतते हुए ट्रेन को रोक दिया और संबंधित रेल अधिकारियों को इसकी सूचना दी।

अचानक ट्रेन रुकने से यात्रियों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई यात्री अपनी सीटों से उठकर स्थिति जानने का प्रयास करने लगे। जब लोगों को पता चला कि आगे पटरी टूटी हुई है और ट्रेन का एक हिस्सा उससे गुजर चुका है तो उनमें भय पैदा हो गया। राहत की बात यह रही कि ट्रेन की कोई बोगी पटरी से नहीं उतरी और किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं मिली।

घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे से जुड़े अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी मौके पर पहुंचे। क्षतिग्रस्त पटरी वाले स्थान को सुरक्षित करते हुए ट्रैक की जांच शुरू की गई। रेलवे कर्मचारियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि फ्रैक्चर कितना गंभीर है और किन परिस्थितियों में पटरी टूटी। मरम्मत कार्य के दौरान संबंधित रेल लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही को नियंत्रित किए जाने की संभावना है।

रेलवे ट्रैक में फ्रैक्चर बेहद गंभीर तकनीकी स्थिति मानी जाती है। तेज रफ्तार ट्रेन के ऐसी पटरी से गुजरने पर इंजन या बोगियों के पटरी से उतरने का खतरा रहता है। यदि लोको पायलट समय पर ट्रेन नहीं रोकते तो घटना बड़े हादसे में बदल सकती थी। ट्रेन में सवार यात्रियों ने चालक की सतर्कता और त्वरित निर्णय की सराहना की।

घटना से रेलवे की ट्रैक निगरानी और नियमित रखरखाव व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्टेशन के यार्ड क्षेत्र में पटरी में इतना गंभीर फ्रैक्चर कब और कैसे हुआ यह जांच का विषय है। यह भी पता लगाया जाना आवश्यक है कि ट्रेन आने से पहले ट्रैक की जांच की गई थी या नहीं। यदि निरीक्षण हुआ था तो फ्रैक्चर का पता क्यों नहीं चल सका इस सवाल का उत्तर भी विस्तृत जांच से सामने आएगा।

रेलवे पटरियों पर मौसम में बदलाव, धातु के फैलाव-सिकुड़ाव, अत्यधिक दबाव और तकनीकी खराबी सहित कई कारणों से फ्रैक्चर हो सकता है। हालांकि सेमापुर में पटरी टूटने की वास्तविक वजह आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिलहाल रेलवे की प्राथमिकता क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और रेल परिचालन को सुरक्षित तरीके से बहाल करना है।

घटना के बाद रेल अधिकारियों द्वारा पटरी के आसपास के हिस्सों की भी जांच किए जाने की संभावना है। तकनीकी कर्मचारी यह सुनिश्चित करेंगे कि क्षतिग्रस्त स्थान के आगे और पीछे ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित है। मरम्मत पूरी होने के बाद निर्धारित मानकों के अनुसार ट्रैक की जांच और परीक्षण किया जाएगा। सुरक्षा संबंधी अनुमति मिलने के बाद ही उस मार्ग पर सामान्य गति से ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा सकेगा।

कटिहार-बरौनी रेलखंड महत्वपूर्ण रेल मार्गों में शामिल है। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। पूर्वोत्तर भारत को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन भी इस रेलखंड से होता है। ऐसे व्यस्त मार्ग पर पटरी टूटने की घटना यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर मानी जा रही है।

लोको पायलट रेल संचालन की सुरक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल होते हैं। यात्रा के दौरान संकेतों, ट्रैक और ट्रेन की स्थिति पर लगातार नजर रखना उनकी जिम्मेदारी होती है। सेमापुर की घटना में चालक की सतर्कता ने संभावित दुर्घटना को टालने में निर्णायक भूमिका निभाई। ट्रेन रोकने के बाद स्थिति की जानकारी तत्काल नियंत्रण कक्ष और स्टेशन प्रशासन को दी गई जिससे मरम्मत दल को मौके पर भेजा जा सका।

ट्रेन में सवार यात्रियों के लिए यह घटना बेहद डराने वाली रही। उन्हें जब मालूम हुआ कि इंजन और एक बोगी टूटी हुई पटरी के ऊपर से गुजर चुकी है तो संभावित खतरे का अंदाजा लगा। यात्रियों ने राहत की सांस ली कि लोको पायलट ने समय रहते खतरे को पहचान लिया और ट्रेन को नियंत्रित तरीके से रोक दिया।

इस घटना के बाद संबंधित रेलखंड पर ट्रैक पेट्रोलिंग और निगरानी बढ़ाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। रेलवे कर्मचारियों को अन्य संवेदनशील स्थानों की जांच करने और किसी भी प्रकार की दरार या तकनीकी समस्या मिलने पर तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। नियमित निरीक्षण के साथ आधुनिक उपकरणों से पटरियों की जांच ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

रेलवे प्रशासन की विस्तृत रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि पटरी में फ्रैक्चर किन कारणों से आया और ट्रेन के गुजरने से पहले इसका पता क्यों नहीं लगाया जा सका। जांच में किसी स्तर पर लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि इंजन और एक बोगी के क्षतिग्रस्त पटरी से गुजरने के बावजूद ट्रेन पटरी से नहीं उतरी और सभी यात्री सुरक्षित रहे।

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