तंबाकू छुड़ाने वाले डॉक्टर खुद लत के शिकार KGMU सर्वे में खुलासा
डॉक्टरों में तंबाकू की लत
लखनऊ: तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने और इसकी लत छुड़ाने में स्वास्थ्यकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन उत्तर प्रदेश में हुए एक सर्वे ने चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के कम्युनिटी डेंटिस्ट्री विभाग के सर्वे में शामिल कुछ दंत चिकित्सकों ने खुद तंबाकू सेवन करने की बात स्वीकार की है। सर्वे में तंबाकू छुड़ाने की काउंसिलिंग से जुड़े प्रशिक्षण की कमी भी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वे में उत्तर प्रदेश के 264 डेंटिस्ट को शामिल किया गया था। इनमें से 14.8 प्रतिशत चिकित्सकों ने खुद तंबाकू का सेवन करने की बात स्वीकार की। यानी मरीजों को तंबाकू से दूर रहने की सलाह देने वाले स्वास्थ्य पेशेवरों के एक हिस्से में भी इसकी लत मौजूद है। विशेषज्ञों के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डॉक्टरों की सलाह और व्यवहार मरीजों को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
केवल 37.1 प्रतिशत को विशेष प्रशिक्षण
सर्वे में एक और अहम तथ्य सामने आया। इसमें शामिल केवल 37.1 प्रतिशत डेंटिस्ट के पास तंबाकू छुड़ाने के लिए मरीजों की काउंसिलिंग करने का विशेष प्रशिक्षण था। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में चिकित्सकों के पास तंबाकू छोड़ने के इच्छुक मरीजों को व्यवस्थित तरीके से सलाह देने के लिए विशेष प्रशिक्षण का अभाव था। तंबाकू का सेवन मुंह और दांतों की समस्याओं के साथ कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। ऐसे में डेंटिस्ट की भूमिका खास हो जाती है क्योंकि नियमित जांच के दौरान वे मुंह में तंबाकू से होने वाले शुरुआती बदलावों की पहचान कर सकते हैं। मरीजों से सीधे संवाद होने के कारण वे उन्हें तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित भी कर सकते हैं।
काउंसिलिंग को मजबूत करने की जरूरत
सर्वे के नतीजे स्वास्थ्य संस्थानों में तंबाकू मुक्ति से जुड़े प्रशिक्षण को और मजबूत करने की जरूरत की ओर इशारा करते हैं। चिकित्सकों को केवल तंबाकू के नुकसान की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें मरीज की आदत समझने, उसकी निर्भरता का आकलन करने और तंबाकू छोड़ने की प्रक्रिया में सही मार्गदर्शन देने का प्रशिक्षण भी जरूरी है। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का स्वयं तंबाकू मुक्त रहना भी जागरूकता अभियान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर मरीज को तंबाकू छोड़ने की सलाह देने वाला चिकित्सक खुद इसका सेवन करता है तो स्वास्थ्य संदेश की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।
KGMU के इस सर्वे से सामने आए आंकड़े बताते हैं कि तंबाकू नियंत्रण के लिए केवल आम लोगों को जागरूक करना पर्याप्त नहीं है। स्वास्थ्य पेशेवरों के प्रशिक्षण और उनकी अपनी तंबाकू सेवन की आदतों पर भी ध्यान देना होगा। चिकित्सा संस्थानों में नियमित प्रशिक्षण और तंबाकू मुक्ति कार्यक्रमों को मजबूत करके मरीजों तक बेहतर काउंसिलिंग पहुंचाई जा सकती है।