मलकपुर बुढेरन। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की मासिक बैठक रविवार को गांव मलकपुर बुढेरन में आयोजित हुई। बैठक में किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान हाईवे निर्माण की जद में आ रही किसानों की जमीन के मुआवजे समेत कई समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने मांग की कि हाईवे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन का मुआवजा सर्किल रेट के मुकाबले दस गुना दिया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को उचित आर्थिक राहत मिल सके।

बैठक में संगठन के पदाधिकारियों और किसानों ने जमीन अधिग्रहण, मुआवजा, स्थानीय प्रशासन से जुड़ी समस्याओं समेत अन्य मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। किसानों ने कहा कि हाईवे निर्माण के लिए जिन किसानों की जमीन ली जा रही है, उनके सामने भविष्य में आजीविका और आर्थिक सुरक्षा का सवाल खड़ा हो सकता है। ऐसे में मुआवजे का निर्धारण किसानों के हितों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

सर्किल रेट से दस गुना मुआवजे की मांग

तहसील क्षेत्र अध्यक्ष ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हाईवे निर्माण की जद में आने वाले किसानों को उनकी जमीन का सर्किल रेट से दस गुना मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीन किसानों की आय और परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार होती है। जमीन अधिग्रहण के बाद किसानों के सामने खेती से होने वाली आय का नुकसान हो सकता है।

उन्होंने कहा कि किसानों को मिलने वाला मुआवजा ऐसा होना चाहिए, जिससे वे जमीन जाने के बाद अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकें। संगठन का कहना है कि किसानों की सहमति और उनके हितों को ध्यान में रखे बिना मुआवजे की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

बैठक में किसानों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं रखीं। कई किसानों ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। संगठन के पदाधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को प्रशासन के सामने मजबूती से रखा जाएगा।

नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

बैठक के बाद किसानों की मांगों से संबंधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया। ज्ञापन में किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों को प्रमुखता से रखा गया। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि किसानों की शिकायतों का जल्द समाधान किया जाए और जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बरती जाए।

किसानों ने कहा कि किसी भी परियोजना के लिए जमीन लेने से पहले प्रभावित किसानों को पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही मुआवजा तय करने में जमीन के वास्तविक मूल्य और किसान के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी है।

10 अगस्त की पंचायत स्थगित

बैठक के दौरान संगठन की ओर से 10 अगस्त को थाने में प्रस्तावित पंचायत को स्थगित करने की घोषणा भी की गई। पदाधिकारियों ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पंचायत को फिलहाल स्थगित किया जा रहा है। आगे की तारीख और कार्यक्रम को लेकर संगठन की ओर से बाद में जानकारी दी जाएगी।

पंचायत स्थगित करने की घोषणा के बाद बैठक में मौजूद किसानों को इसकी जानकारी दी गई। संगठन ने कहा कि किसानों के मुद्दों को लेकर गतिविधियां जारी रहेंगी और जरूरत पड़ने पर प्रशासन के समक्ष फिर से मांगें उठाई जाएंगी।

किसानों ने जताई एकजुटता

मासिक बैठक में बड़ी संख्या में किसान और संगठन से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे। किसानों ने कहा कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजे का मुद्दा उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि यदि जमीन चली जाती है तो केवल जमीन का बाजार मूल्य मिलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परिवार की भविष्य की आर्थिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा।

किसानों ने संगठन के माध्यम से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की बात कही। उनका कहना है कि उचित मुआवजे के साथ प्रभावित परिवारों के हितों की भी रक्षा होनी चाहिए।

हाईवे परियोजना से प्रभावित किसानों की चिंता

हाईवे निर्माण जैसी बड़ी परियोजनाओं से जहां क्षेत्र में आवागमन और विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद रहती है, वहीं जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसानों की चिंताएं भी सामने आती हैं। खेती पर निर्भर परिवारों के लिए जमीन का अधिग्रहण आय के स्थायी स्रोत पर असर डाल सकता है।

किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं का विरोध उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि उचित मुआवजा और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए ही किसानों और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

बैठक के बाद ज्ञापन सौंपे जाने से किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि किसानों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना जारी रहेगा।

फिलहाल भाकियू टिकैत की मासिक बैठक में हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। किसानों ने सर्किल रेट से दस गुना मुआवजे की मांग रखी है। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से किसानों की मांग पर क्या कदम उठाया जाता है।

Tags: