बलिया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में निधन हो गया। वह कई दिनों से अस्पताल के पोस्टऑपरेटिव आईसीयू में भर्ती थे। उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर शनिवार शाम तक बलिया पहुंचने की संभावना है। 27 सितंबर रविवार को उनके गांव में सरयू नदी के किनारे अंतिम संस्कार किया जाएगा।

राम गोविंद चौधरी के निधन की खबर मिलते ही बलिया सहित पूरे उत्तर प्रदेश में उनके समर्थकों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। अंतिम यात्रा में परिवार के सदस्यों, ग्रामीणों, समर्थकों और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है।

राम गोविंद चौधरी ने शुक्रवार रात करीब 10:15 बजे लखनऊ के पीजीआई में अंतिम सांस ली। अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था और हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया था। एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमन ने उनके निधन की पुष्टि की। निधन की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य, समर्थक और समाजवादी पार्टी के नेता अस्पताल पहुंचने लगे थे।

शनिवार को उनका पार्थिव शरीर लखनऊ से बलिया ले जाया जा रहा है। पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। क्षेत्र के लोग अपने लंबे समय के नेता को श्रद्धांजलि देंगे। रविवार को अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और गांव के पास सरयू नदी के किनारे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति के अनुभवी नेताओं में शामिल थे। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। वर्ष 1971-72 के दौरान वह छात्रसंघ की राजनीति में प्रमुख रूप से सक्रिय रहे और बाद में छात्रसंघ अध्यक्ष भी बने।

छात्र राजनीति के बाद राम गोविंद चौधरी जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े। वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और करीब 19 महीने जेल में रहना पड़ा। समाजवादी विचारधारा से प्रभावित चौधरी के राजनीतिक जीवन पर जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का प्रभाव रहा।

वर्ष 1977 में उन्होंने पहली बार चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया। वह कुल आठ बार विधायक चुने गए। चिलकहर के बाद उन्होंने बांसडीह विधानसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया।

लंबे राजनीतिक जीवन में राम गोविंद चौधरी ने उत्तर प्रदेश सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। मुलायम सिंह यादव की सरकार में वह मंत्री रहे। वर्ष 1990-91 में उन्होंने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2003 से 2007 के बीच मुलायम सरकार में बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री रहे।

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार में भी राम गोविंद चौधरी को मंत्री बनाया गया। उन्होंने 2012 से 2017 के दौरान महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। सत्ता के साथ-साथ संगठन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही और वह समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सहित विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके थे।

वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने 2017 से 2022 तक नेता प्रतिपक्ष के रूप में काम किया। विधानसभा में अपनी भाषण शैली, तर्क और जमीनी मुद्दों को उठाने के तरीके के कारण उनकी अलग पहचान रही।

उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय सहित कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। अखिलेश यादव ने उन्हें संघर्षशील नेता बताते हुए समाजवादी आंदोलन में उनके योगदान को याद किया।

बलिया में राम गोविंद चौधरी की पहचान लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले प्रमुख नेताओं में रही। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर विधानसभा, मंत्री पद और नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचा। करीब पांच दशक के राजनीतिक जीवन में वह विभिन्न आंदोलनों और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे।

अब उनके निधन के बाद बलिया स्थित गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं। शनिवार शाम तक पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद समर्थक और क्षेत्रीय लोग अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि देंगे। रविवार को अंतिम यात्रा के बाद सरयू नदी के किनारे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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