हापुड़। सड़क पर हादसों और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाईवे पर तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाने, खतरनाक तरीके से ओवरटेक करने और सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा से जुड़े जिम्मेदार विभाग इन जोखिमों पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं।
इस साल अब तक 341 बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं। इन दुर्घटनाओं में 209 लोगों की मौत हुई है, जबकि 853 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 400 से अधिक लोगों की हालत गंभीर रही। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 18.6 प्रतिशत बढ़ा है।
लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों और दूसरी प्रमुख सड़कों पर नियमों का उल्लंघन हादसों की बड़ी वजह बन रहा है। इसके बावजूद एनएचएआई, यूपीडा, परिवहन विभाग, पीडब्ल्यूडी और पुलिस की ओर से किए जा रहे प्रयास हादसों को रोकने में पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं।
341 बड़े हादसों में 209 लोगों की मौत
इस साल अब तक सामने आए आंकड़े सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति को दिखा रहे हैं। कुल 341 बड़े सड़क हादसों में 209 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इसके अलावा 853 लोग घायल हुए हैं।
घायलों में 400 से अधिक लोगों की हालत गंभीर रही। यानी सड़क दुर्घटनाओं का असर केवल मौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में लोग गंभीर चोटों का भी सामना कर रहे हैं।
पिछले साल की समान अवधि से तुलना करें तो मौतों की संख्या में 18.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी बताती है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
तेज रफ्तार बन रही बड़ा खतरा
हाईवे पर तेज रफ्तार हादसों का प्रमुख जोखिम बनी हुई है। निर्धारित सीमा से अधिक गति से चलने वाले वाहन चालक खुद के साथ दूसरे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं।
तेज गति में वाहन चलाते समय अचानक सामने किसी दूसरे वाहन या बाधा के आने पर चालक को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। ऐसी स्थिति में दुर्घटना गंभीर हो सकती है।
हाईवे पर वाहनों की रफ्तार अधिक होने के कारण टक्कर की स्थिति में नुकसान भी ज्यादा होता है। इसी वजह से सड़क सुरक्षा के लिए गति सीमा का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।
गलत दिशा में चलने से बढ़ रहा जोखिम
गलत दिशा में वाहन चलाना भी हादसों का बड़ा कारण बन रहा है। समय या दूरी बचाने के लिए कई वाहन चालक नियमों की अनदेखी करते हुए विपरीत दिशा में वाहन लेकर निकल जाते हैं।
हाईवे पर तेज गति से आ रहे वाहन के सामने अचानक गलत दिशा से कोई वाहन आने पर दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। रात के समय यह जोखिम और अधिक हो जाता है।
गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर नियमित कार्रवाई और ऐसे स्थानों की पहचान जरूरी है, जहां यह समस्या बार-बार सामने आ रही है।
खतरनाक ओवरटेक भी बड़ी समस्या
सड़क पर गलत और खतरनाक तरीके से ओवरटेक करना भी दुर्घटनाओं की वजह बन रहा है। कई बार वाहन चालक आगे निकलने की जल्दबाजी में सड़क की स्थिति और सामने से आ रहे वाहनों का ध्यान नहीं रखते।
हाईवे पर इस तरह की छोटी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। खासकर भारी वाहनों के बीच से निकलने और कम जगह में ओवरटेक करने की कोशिश जोखिम को और बढ़ा देती है।
सड़क सुरक्षा के लिए वाहन चालकों को निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी है। इसके साथ ही नियम तोड़ने वालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई भी आवश्यक है।
सड़क किनारे खड़े वाहन भी खतरा
सड़क और हाईवे के किनारे खड़े वाहन भी दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। कई बार भारी वाहन सड़क के किनारे या सड़क के एक हिस्से पर खड़े कर दिए जाते हैं।
रात के समय पर्याप्त रोशनी या संकेत नहीं होने की स्थिति में पीछे से आने वाले वाहन चालकों को खड़े वाहन का समय रहते पता नहीं चल पाता। ऐसी स्थिति में वाहन सीधे खड़े ट्रक या दूसरे भारी वाहन से टकरा सकते हैं।
हाईवे पर अनधिकृत तरीके से वाहन खड़े करने पर रोक लगाने और पार्किंग के लिए सुरक्षित स्थान सुनिश्चित करने की जरूरत है।
कई विभागों पर सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी
सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है। एनएचएआई, यूपीडा, परिवहन विभाग, पीडब्ल्यूडी और पुलिस की अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं।
सड़क की स्थिति सुधारने, यातायात नियमों का पालन कराने, तेज रफ्तार पर नियंत्रण, गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई और दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान जैसे काम विभिन्न विभागों के समन्वय से किए जाने हैं।
इसके बावजूद लगातार हो रहे हादसे यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि सड़क सुरक्षा के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं जमीन पर कितनी प्रभावी हैं।
मौतों में 18.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी
सबसे गंभीर आंकड़ा सड़क हादसों में हुई मौतों की बढ़ोतरी का है। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इस साल मौतों में 18.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इस बढ़ोतरी ने सड़क सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। यदि सड़क पर जोखिम वाले कारणों की पहचान करने के बाद भी उन्हें समय रहते दूर नहीं किया जाता है तो दुर्घटनाओं की संख्या कम करना मुश्किल होगा।
341 बड़े हादसों और उनमें 209 लोगों की मौत का आंकड़ा बताता है कि सड़क सुरक्षा को लेकर अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
हादसे रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई जरूरी
लगातार हो रहे सड़क हादसों को रोकने के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है। उनका सख्ती से पालन कराना भी जरूरी है। तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाने और खतरनाक ओवरटेक पर प्रभावी कार्रवाई के साथ सड़क किनारे खड़े वाहनों को हटाना भी जरूरी है।
इसके साथ ही हादसा संभावित स्थानों की पहचान कर वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता है। संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है।
इस साल अब तक 209 लोगों की मौत और 853 लोगों के घायल होने के आंकड़े ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में मौतों में 18.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद जिम्मेदार विभागों के सामने सड़क हादसों को रोकने की चुनौती और बड़ी हो गई है।