31 हजार से ज्यादा शिक्षकों के समायोजन पर फैसला जल्द,
आपत्तियों के बाद होगी प्रक्रिया
Prayagraj प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों के समायोजन और तैनाती को लेकर जारी सरप्लस शिक्षकों की सूची पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने शिक्षकों को सूची पर आपत्ति दाखिल करने के लिए 27 जुलाई तक का समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने सौरभ कुमार सिंह समेत छह अन्य की विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता महेश शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की ओर से तैयार की गई सूची में प्रदेश भर के 31,685 शिक्षकों को सरप्लस यानी अतिरिक्त शिक्षक के रूप में चिह्नित किया गया है। इन शिक्षकों का समायोजन ऐसे विद्यालयों में करने की योजना है, जहां शिक्षकों की संख्या कम है या फिर विद्यालयों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है।
सरकार की इस प्रक्रिया का उद्देश्य प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण करना है, ताकि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है वहां पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जा सकें। हालांकि, इस सूची को लेकर कई शिक्षकों ने आपत्ति जताई है और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
अपीलकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है। उनका कहना है कि समायोजन की प्रक्रिया में कई जगह नियमों की अनदेखी हो सकती है। साथ ही आशंका जताई गई कि कई विद्यालयों में सबसे वरिष्ठ शिक्षकों को ही सरप्लस घोषित किया जा सकता है, जिससे उन्हें अनावश्यक रूप से स्थानांतरण या समायोजन की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
शिक्षकों की ओर से यह भी कहा गया कि किसी भी शिक्षक को सरप्लस घोषित करने से पहले विद्यालयों में छात्रों की संख्या, स्वीकृत पदों और शिक्षक-छात्र अनुपात का सही आकलन किया जाना जरूरी है। उन्होंने मांग की कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए, ताकि किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षकों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सूची में शामिल शिक्षक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां संबंधित विभाग के समक्ष दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद विभाग को इन आपत्तियों पर विचार करना होगा।
प्रदेश में शिक्षकों के समायोजन की यह प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, जबकि कुछ स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक तैनात हैं। इसी असमानता को दूर करने के लिए सरप्लस शिक्षकों की पहचान की गई है।
अब शिक्षकों को 27 जुलाई तक आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद हजारों शिक्षकों की नजरें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। शिक्षकों को उम्मीद है कि उनकी आपत्तियों पर निष्पक्ष तरीके से विचार किया जाएगा और अंतिम निर्णय नियमों के अनुसार लिया जाएगा।