- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- Gonda; में सहकारिता...
Gonda; में सहकारिता विभाग सख्त, खाद बिक्री की रकम वसूलने की कवायद तेज

Gonda गोंडा : उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में साधन सहकारी समितियों से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय मामला सामने आया है। खाद बिक्री से प्राप्त सरकारी धनराशि जमा नहीं करने वाले पूर्व सचिवों पर अब सहकारिता विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विभाग ने जिले के 30 सेवानिवृत्त सचिवों को अंतिम नोटिस जारी करते हुए सात दिन के भीतर बकाया राशि सरकारी खाते में जमा करने के निर्देश दिए हैं।
सहकारिता विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा के अंदर धनराशि जमा नहीं की गई तो संबंधित पूर्व सचिवों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग की ओर से एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही राजस्व वसूली और अन्य विभागीय कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता रविशंकर चौधरी की ओर से 18 जुलाई को जारी नोटिस में कहा गया है कि सरकारी धन के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही या वित्तीय अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नोटिस में सभी संबंधित पूर्व सचिवों को अंतिम अवसर देते हुए बकाया राशि जल्द जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागीय जांच में सामने आया है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच कई सचिव साधन सहकारी समितियों में कार्यरत रहने के बाद सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन खाद बिक्री से प्राप्त सरकारी धनराशि विभागीय खातों में जमा नहीं की। इसके कारण सरकारी राजस्व को करीब 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, समितियों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाती है। खाद बिक्री से मिलने वाली राशि को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकारी खाते में जमा करना होता है। लेकिन कुछ पूर्व सचिवों द्वारा इस राशि को जमा नहीं किए जाने के मामले सामने आए हैं।
अब विभाग ने सभी संबंधित पूर्व सचिवों को अंतिम नोटिस देकर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन की सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखना विभाग की प्राथमिकता है। यदि नोटिस के बाद भी संबंधित लोग भुगतान नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में किसी भी व्यक्ति को राहत नहीं दी जाएगी, चाहे वह वर्तमान कर्मचारी हो या सेवानिवृत्त अधिकारी। सरकारी धन की वसूली के लिए सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस कार्रवाई के बाद सहकारिता विभाग से जुड़े अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। विभाग का कहना है कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
गोंडा में सामने आए इस मामले को सहकारिता विभाग की बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नोटिस की समय सीमा पूरी होने के बाद कितनी राशि जमा होती है और किन पूर्व सचिवों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।





