लोन के नाम पर साइबर ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

Update: 2026-07-26 04:32 GMT

गोरखपुर :  उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में चिलुआताल पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो जरूरतमंद लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और बाद में उन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए करता था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य लोगों से उनके बैंक खाते, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल सिम तक अपने कब्जे में ले लेते थे।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपित लोगों को आर्थिक मदद और आसान लोन दिलाने का लालच देते थे। जरूरतमंद लोग उनकी बातों में आ जाते थे और लोन मिलने की उम्मीद में अपने दस्तावेज उपलब्ध करा देते थे। इसके बाद आरोपी उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाते थे और खातों की पूरी जानकारी अपने पास रख लेते थे।

जांच में सामने आया कि आरोपी बैंक खाता खुलवाने के बाद खाताधारक से इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी, मोबाइल नंबर और सिम कार्ड भी अपने नियंत्रण में ले लेते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। इस तरह जरूरतमंद लोग अनजाने में साइबर अपराध के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों के मालिक बन जाते थे।

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। लोन दिलाने का झांसा देकर बैंक खाते खुलवाना भी इसी तरह की एक नई रणनीति है। ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति को शुरुआत में किसी तरह का नुकसान दिखाई नहीं देता, लेकिन बाद में जब उन खातों से अवैध लेनदेन की जानकारी सामने आती है तो खाताधारक भी जांच के घेरे में आ जाते हैं।

चिलुआताल पुलिस ने सूचना और जांच के आधार पर कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े दो आरोपितों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच आगे बढ़ने पर कई और लोगों के शामिल होने की संभावना है।

पुलिस जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपितों ने अब तक कितने लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए हैं और इन खातों के जरिए कितनी रकम का लेनदेन किया गया है। इसके लिए बैंक खातों की जानकारी, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी या मोबाइल सिम किसी को न दें। उन्होंने कहा कि आसान लोन या आर्थिक सहायता का लालच देकर ठग लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। ऐसे किसी भी प्रस्ताव की जानकारी संबंधित बैंक या पुलिस को जरूर देनी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर अपराध में बैंक खातों का इस्तेमाल एक बड़ी चुनौती बन गया है। अपराधी अक्सर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जिन्हें पैसों की जरूरत होती है और जो जल्दी आर्थिक मदद पाने की उम्मीद में अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं। बाद में उन्हीं खातों का उपयोग ठगी की रकम को छिपाने और दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के दौरान उनके नेटवर्क और काम करने के तरीके की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने किन-किन क्षेत्रों में लोगों को अपना शिकार बनाया है।

चिलुआताल पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी से जुड़े मामलों में लोगों की जागरूकता सबसे अहम है। यदि लोग अपनी बैंकिंग जानकारी और दस्तावेजों को लेकर सतर्क रहें तो ऐसे अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों का खुलासा हो सकता है।

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