लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिवपुराण कथा में शामिल हुए और धर्म, सनातन संस्कृति तथा सामाजिक एकता को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास और मुगल सम्राट अकबर से जुड़ा एक प्रचलित प्रसंग भी सुनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म समाज की शक्ति है और जब समाज अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जागरूक रहता है तो वह अधिक संगठित और मजबूत बनता है।
शिवपुराण कथा के धार्मिक वातावरण के बीच मुख्यमंत्री ने संत परंपरा और भारतीय संस्कृति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने हमेशा मानव कल्याण, सेवा और समाज को जोड़ने का संदेश दिया है। धार्मिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
शिवपुराण कथा में पहुंचे योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर आयोजकों और श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। योगी ने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया और संतों तथा कथा से जुड़े लोगों से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान शिव की महिमा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का चरित्र त्याग, तपस्या और लोक कल्याण की भावना का संदेश देता है।
उन्होंने शिवपुराण कथा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने वाला माध्यम बताया।
अकबर और तुलसीदास का सुनाया प्रसंग
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन के दौरान गोस्वामी तुलसीदास और अकबर से जुड़ी एक लोकप्रचलित कथा का जिक्र किया। उन्होंने इस कहानी के जरिए भक्ति और आस्था की शक्ति को रेखांकित किया।
लोकमान्यताओं में तुलसीदास और अकबर को लेकर कई प्रसंग प्रचलित हैं। इनमें एक प्रसिद्ध कथा तुलसीदास की हनुमान भक्ति और तत्कालीन सत्ता के साथ उनके संवाद से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग के माध्यम से यह बताने की कोशिश की कि संतों की आध्यात्मिक शक्ति और उनके प्रति समाज की आस्था को केवल राजनीतिक सत्ता से नहीं आंका जा सकता।
हालांकि अकबर और तुलसीदास से संबंधित ऐसी कई कथाएं लोक और धार्मिक परंपराओं में मिलती हैं तथा उनके सभी विवरणों की ऐतिहासिक पुष्टि समान रूप से नहीं होती।
धर्म समाज की शक्ति है'
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म समाज की शक्ति है। उनके मुताबिक धर्म केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति को अपने कर्तव्य का बोध भी कराता है।
उन्होंने कहा कि समाज जब अपने मूल्यों, संस्कृति और परंपराओं को समझता है तो उसमें आत्मविश्वास पैदा होता है।
मुख्यमंत्री ने धर्म को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए सेवा, सदाचार और लोक कल्याण को महत्वपूर्ण बताया।
सनातन धर्म पर दिया जोर
मुख्यमंत्री योगी ने सनातन धर्म की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की विशेषता उसकी प्राचीनता और निरंतरता है।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग कालखंडों में अनेक चुनौतियां आने के बावजूद भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं कायम रहीं।
योगी ने नई पीढ़ी को अपनी विरासत के बारे में जानकारी देने की जरूरत पर भी जोर दिया।
संत परंपरा ने समाज को दिखाई राह
मुख्यमंत्री ने भारतीय संत परंपरा की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि संतों ने समय-समय पर समाज को दिशा देने का काम किया है।
गोस्वामी तुलसीदास इसी भक्ति परंपरा के प्रमुख संत-कवियों में शामिल हैं। उनकी रचना रामचरितमानस ने भगवान राम की कथा को जन-जन तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
भक्ति आंदोलन के दौरान तुलसीदास के साथ कबीर, सूरदास, मीराबाई और अन्य संत-कवियों की रचनाओं ने भी भारतीय समाज और साहित्य पर गहरा प्रभाव डाला।
रामचरितमानस का भी महत्व
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस उत्तर भारत की सबसे प्रभावशाली धार्मिक-साहित्यिक रचनाओं में शामिल है। अवधी में लिखी गई इस रचना ने रामकथा को आम लोगों की भाषा में प्रस्तुत किया।
आज भी देश के अलग-अलग हिस्सों में रामकथा, रामलीला और धार्मिक आयोजनों में रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ किया जाता है।
मुख्यमंत्री द्वारा तुलसीदास का उल्लेख इसी व्यापक सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है।
शिवपुराण का क्या है महत्व?
शिवपुराण हिंदू धर्म के प्रमुख पुराणों में शामिल है। इसमें भगवान शिव, माता पार्वती और उनसे संबंधित विभिन्न धार्मिक कथाओं का वर्णन मिलता है।
देशभर में शिवपुराण कथा के आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। कथा के माध्यम से भगवान शिव से जुड़ी कथाओं और धार्मिक संदेशों को लोगों तक पहुंचाया जाता है।
योगी ने ऐसे आयोजनों को समाज में आध्यात्मिक चेतना बढ़ाने वाला बताया।
धार्मिक आयोजन से मजबूत होती है सामाजिक एकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों में समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग एक साथ आते हैं। इससे आपसी संवाद और सामाजिक जुड़ाव मजबूत होता है।
उनका कहना था कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और सेवा की भावना को बढ़ावा देना भी होना चाहिए।
उन्होंने लोगों से धार्मिक आयोजनों के दौरान सामाजिक सद्भाव और अनुशासन बनाए रखने की भी अपील की।
धार्मिक पर्यटन पर सरकार का जोर
उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर देती रही है। अयोध्या, वाराणसी, मथुरा और अन्य धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं तथा पर्यटन से जुड़े विकास कार्य किए गए हैं।
सरकार का तर्क है कि धार्मिक पर्यटन से स्थानीय रोजगार, कारोबार और अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलता है।
योगी आदित्यनाथ कई मौकों पर विरासत और विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की बात करते रहे हैं।
संस्कृति से जुड़े रहने का दिया संदेश
शिवपुराण कथा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन धर्म, संत परंपरा और सामाजिक एकता पर केंद्रित रहा। अकबर और तुलसीदास से जुड़ी प्रचलित कथा सुनाते हुए उन्होंने आस्था की शक्ति का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को अपनी संस्कृति और धार्मिक विरासत से जुड़े रहना चाहिए। उनके मुताबिक धर्म समाज को संगठित करने के साथ व्यक्ति को कर्तव्य और लोक कल्याण का रास्ता भी दिखाता है।
शिवपुराण कथा के मंच से दिया गया उनका संदेश यही रहा कि सनातन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और सामाजिक एकता बनाए रखने में धार्मिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।