गोंडा। उत्तर प्रदेश में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना सांसद **चंद्रशेखर आजाद** के गोंडा जाने के दौरान रविवार को जमकर हंगामा हुआ। रास्ते में पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद चंद्रशेखर और उनके समर्थकों की पुलिसकर्मियों से बहस हुई और स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। नाराज चंद्रशेखर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनके काफिले की ओर जूते-चप्पल फेंके जाने की घटना ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।
घटनाक्रम के बाद मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, जबकि चंद्रशेखर और उनके समर्थक आगे जाने की अनुमति देने की मांग करते रहे। पूरे घटनाक्रम के कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं।
गोंडा जा रहे थे चंद्रशेखर आजाद
जानकारी के मुताबिक, चंद्रशेखर आजाद अपने समर्थकों के साथ गोंडा की ओर जा रहे थे। उनके दौरे को देखते हुए पुलिस ने रास्ते में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।
इसी दौरान पुलिस ने उनके काफिले को एक स्थान पर रोक दिया। चंद्रशेखर ने आगे जाने की अनुमति मांगी, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर उन्हें रोकने की कोशिश की।
इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई।
पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की
चंद्रशेखर के काफिले को रोके जाने की जानकारी मिलते ही उनके समर्थक भी मौके पर जमा होने लगे। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
पुलिसकर्मियों ने बैरिकेडिंग के जरिए भीड़ को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। दूसरी ओर कार्यकर्ता चंद्रशेखर को गोंडा जाने की अनुमति देने की मांग करते रहे।
हालात बिगड़ते देख वरिष्ठ अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया।
सड़क पर धरने पर बैठे सांसद
आगे जाने से रोके जाने पर चंद्रशेखर आजाद नाराज हो गए और अपने समर्थकों के साथ सड़क पर धरने पर बैठ गए।
उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक निर्वाचित सांसद को लोगों से मिलने से रोकना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से यह भी पूछा कि आखिर उन्हें किस आधार पर आगे नहीं जाने दिया जा रहा है।
धरने के कारण वहां लोगों की भीड़ बढ़ गई और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी।
काफिले पर फेंके गए जूते-चप्पल
इसी घटनाक्रम के दौरान चंद्रशेखर आजाद के काफिले की ओर कथित तौर पर जूते और चप्पल फेंके गए। इसके बाद उनके समर्थकों में नाराजगी और बढ़ गई।
घटना किसने और किन परिस्थितियों में की, इसे लेकर तत्काल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। पुलिस ने हालात बिगड़ने से रोकने के लिए दोनों पक्षों को अलग रखने और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की।
इस घटना से संबंधित वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए, हालांकि वीडियो के अलग-अलग हिस्सों को लेकर विभिन्न दावे किए गए।
भारी पुलिस बल किया गया तैनात
विवाद बढ़ने के बाद मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।
पुलिस की प्राथमिकता किसी भी तरह के टकराव को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना रही। आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई।
समर्थकों ने जताई नाराजगी
आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चंद्रशेखर को रोके जाने का विरोध किया। उनका कहना था कि पार्टी प्रमुख पहले से तय कार्यक्रम के तहत गोंडा जा रहे थे और उन्हें रास्ते में रोकना सही नहीं है।
कार्यकर्ताओं ने काफिले की ओर जूते-चप्पल फेंके जाने की घटना पर भी कार्रवाई की मांग की।
दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि संवेदनशील परिस्थितियों में सुरक्षा को देखते हुए जरूरी कदम उठाए जाते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
घटना के कुछ ही समय बाद पुलिस और समर्थकों के बीच हुई नोकझोंक तथा धरने से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे।
इन वीडियो को लेकर राजनीतिक समर्थकों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए। ऐसे में पुलिस और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यूपी की राजनीति में बढ़ सकती है गर्मी
चंद्रशेखर आजाद पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में तेजी से उभरे हैं। नगीना लोकसभा सीट से जीत के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता और बढ़ी है।
वह दलित अधिकारों, सामाजिक न्याय और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर लगातार सरकार को घेरते रहे हैं। ऐसे में गोंडा जाने से रोके जाने का मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर
फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रही है। काफिले की तरफ जूते-चप्पल फेंकने वाले लोगों की पहचान और घटना के पीछे की वजह भी जांच का विषय हो सकती है।
चंद्रशेखर आजाद और पुलिस के बीच हुई धक्का-मुक्की तथा इसके बाद धरने ने गोंडा में राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। अब इस मामले में प्रशासन और आजाद समाज पार्टी की ओर से आने वाले आधिकारिक बयानों पर नजर रहेगी।