रॉबर्ट्सगंज: अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने रविवार को रॉबर्ट्सगंज स्थित डीआर ड्रीम्स हाल में आयोजित कार्यकर्ता समागम में समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से बाहर होने के बाद ही सपा को पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज की याद आती है। चुनाव नजदीक आते ही इन वर्गों के नाम पर राजनीति शुरू कर दी जाती है, जबकि सत्ता में रहने के दौरान उनके हितों और समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

कार्यकर्ता समागम को संबोधित करते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि पिछड़े, दलित, शोषित और वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई अपना दल (एस) लगातार लड़ता रहा है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने इन वर्गों से जुड़े मुद्दों को सदन के भीतर उठाने के साथ सड़कों पर भी संघर्ष किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन की नीतियों और सरकार में रहते हुए किए गए कामों की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि राजनीति केवल चुनाव के समय किसी सामाजिक वर्ग का नाम लेने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जनता के मुद्दों को लगातार उठाना और उन्हें समाधान तक पहुंचाने का प्रयास करना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने सत्ता से बाहर होने के बाद पीडीए का नारा प्रमुखता से उठाया, लेकिन सत्ता में रहते हुए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के हित उसकी प्राथमिकता में दिखाई नहीं दिए।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि विपक्ष के नारों और दावों का जवाब जनता के बीच जाकर दिया जाना चाहिए। पार्टी कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के प्रत्येक गांव, पंचायत और बूथ तक पहुंचें तथा लोगों से सीधा संवाद करें। इस दौरान जनता को पार्टी की विचारधारा, सामाजिक न्याय से जुड़े प्रयासों और सरकार में भागीदारी के दौरान किए गए कार्यों के बारे में बताया जाए।

अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संगठन की मजबूती पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं। बड़े कार्यक्रमों और सभाओं के साथ बूथ स्तर पर सक्रिय संगठन होना जरूरी है। कार्यकर्ताओं को नियमित रूप से जनता के बीच रहकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए और समाधान के लिए संबंधित मंच पर आवाज उठानी चाहिए।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उनकी पार्टी का राजनीतिक आधार सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व से जुड़ा है। पार्टी पिछड़े और दलित समाज के साथ उन सभी वर्गों के अधिकारों की बात करती है, जिन्हें लंबे समय तक राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक भागीदारी से दूर रखा गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें और उसे संगठन की नीतियों से जोड़ें।

समागम में उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि आगामी राजनीतिक मुकाबलों में सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सपा के पीडीए अभियान पर हमला करते हुए उन्होंने अपने दल को पिछड़े और वंचित समाज की निरंतर आवाज के रूप में प्रस्तुत किया। उनके संबोधन का बड़ा हिस्सा कार्यकर्ताओं को चुनावी और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने पर केंद्रित रहा।

उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को केवल चुनाव के समय सक्रिय होने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए। गांवों में नियमित बैठकें आयोजित की जाएं और स्थानीय समस्याओं की सूची तैयार की जाए। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं के लाभ से संबंधित मामलों को प्राथमिकता से उठाया जाए। इससे लोगों का संगठन पर विश्वास बढ़ेगा और पार्टी का जनाधार भी मजबूत होगा।

केंद्रीय मंत्री ने कार्यकर्ताओं को सरकार में किए गए कार्यों की जानकारी सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाने की सलाह दी। उनका कहना था कि कई बार जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतिगत फैसलों की सही जानकारी पात्र व्यक्तियों तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे योजनाओं के बारे में बताएं और पात्र लोगों को उनका लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाने में मदद करें।

कार्यक्रम में संगठन विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व का जोर गांव और बूथ स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम तैयार करने पर रहा। युवाओं, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी बढ़ाने को संगठन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेदों को दूर रखकर सामूहिक लक्ष्य के लिए काम करने की अपील की गई।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि अपना दल (एस) ने सदन में पिछड़े और वंचित समाज के सवालों को लगातार प्रमुखता दी है। पार्टी की राजनीति केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह नीतिगत स्तर पर भी सामाजिक भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इन बातों को जनता के बीच तथ्यात्मक रूप से रखने और पार्टी के पक्ष में विश्वास का वातावरण बनाने को कहा।

सपा पर किए गए उनके हमले से स्पष्ट है कि आने वाले समय में पीडीए की राजनीति उत्तर प्रदेश में प्रमुख चुनावी मुद्दा बनी रहेगी। समाजवादी पार्टी जहां पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाने की रणनीति अपना रही है, वहीं अपना दल (एस) स्वयं को इन वर्गों के अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष करने वाले संगठन के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

कार्यकर्ता समागम के माध्यम से पार्टी ने रॉबर्ट्सगंज और आसपास के क्षेत्रों में अपनी संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने का संकेत दिया। अनुप्रिया पटेल ने कार्यकर्ताओं से लोगों के बीच लगातार उपस्थित रहने और स्थानीय मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि जनता से मजबूत संबंध ही किसी भी संगठन को चुनावी और राजनीतिक सफलता दिलाते हैं।

कुल मिलाकर, कार्यकर्ता समागम में अनुप्रिया पटेल ने सपा के पीडीए अभियान की आलोचना करते हुए अपना दल (एस) की सामाजिक न्याय की राजनीति को सामने रखा। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर जनसंपर्क करने, सरकार के कार्यों की जानकारी देने और पिछड़े, दलित, शोषित तथा वंचित समाज के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का संदेश दिया।

Tags: