उत्तर प्रदेश। एक तरफ बेसिक शिक्षा विभाग परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी सामने आई है। जिले के 111 परिषदीय विद्यालयों में आज भी बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब सात हजार छात्र-छात्राएं टाट-पट्टी और चटाई पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार, इन विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए 2,336 बेंच की आवश्यकता है। फर्नीचर की कमी दूर करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने शासन से बजट की मांग की है।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल 1,254 परिषदीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन स्कूलों में लगभग 1 लाख 2 हजार 800 बच्चे पंजीकृत हैं। सरकार की ओर से विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके बावजूद 111 विद्यालयों में फर्नीचर का अभाव शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी जरूरतों पर सवाल खड़े कर रहा है।
111 स्कूलों में आज भी जमीन पर बैठकर पढ़ाई
जिले के 111 परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए बेंच और डेस्क की व्यवस्था नहीं होने की जानकारी सामने आई है। इन विद्यालयों में करीब सात हजार विद्यार्थी नामांकित हैं।
फर्नीचर की कमी के कारण बच्चों को कक्षाओं में टाट-पट्टी या चटाई पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जबकि सरकारी विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
विद्यालयों में विद्यार्थियों के बैठने की उचित व्यवस्था शिक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। खासकर छोटे बच्चों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित कक्षा का वातावरण होना जरूरी माना जाता है।
बेंच और डेस्क उपलब्ध होने से बच्चों को किताबें तथा कॉपियां रखने और लिखने-पढ़ने में सुविधा मिलती है। वहीं फर्नीचर के अभाव में विद्यार्थियों को जमीन पर बैठकर ही अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ रही है।सात हजार विद्यार्थियों के लिए चाहिए 2,336 बेंचबेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, जिन 111 विद्यालयों में फर्नीचर की कमी है, वहां करीब सात हजार बच्चे पढ़ रहे हैं।
इन विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था करने के लिए कुल 2,336 बेंच की जरूरत बताई गई है। विभाग ने आवश्यक फर्नीचर की संख्या का आकलन करने के बाद शासन से बजट की मांग की है।
बजट मिलने के बाद इन विद्यालयों में बेंच की व्यवस्था करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। हालांकि, शासन से कितनी धनराशि मांगी गई है और फर्नीचर खरीद के लिए बजट कब तक मिलेगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।ऐसे में संबंधित विद्यालयों के विद्यार्थियों को बैठने की बेहतर व्यवस्था मिलने में कितना समय लगेगा, यह स्पष्ट नहीं है।
जिले में संचालित हैं 1,254 परिषदीय विद्यालय
बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 1,254 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें लगभग 1,02,800 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।सरकार इन बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और विद्यालयों में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें दी जाती हैं, ताकि पढ़ाई के लिए आवश्यक किताबें उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा यूनिफॉर्म और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।
लेकिन इन सुविधाओं के बावजूद कुछ विद्यालयों में बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं होना महत्वपूर्ण समस्या है। बेहतर शिक्षा के लिए शिक्षण सामग्री के साथ उपयुक्त कक्षा सुविधाएं भी आवश्यक हैं।
कक्षा में बेहतर माहौल के लिए जरूरी है फर्नीचर
स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए केवल किताबें और शिक्षक ही पर्याप्त नहीं हैं। बच्चों को पढ़ाई के अनुकूल वातावरण मिलना भी आवश्यक है।कक्षाओं में बैठने की उचित व्यवस्था होने से विद्यार्थियों को लिखने, पढ़ने और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में सुविधा मिलती है। डेस्क और बेंच की ऊंचाई बच्चों की उम्र के अनुसार होनी चाहिए, ताकि वे आराम से बैठकर पढ़ सकें।
जमीन पर बैठकर पढ़ाई करना अपने आप में शिक्षा की गुणवत्ता का प्रमाण नहीं है, लेकिन यदि बच्चों को लंबे समय तक असुविधाजनक परिस्थितियों में बैठना पड़े तो उनकी एकाग्रता और आराम प्रभावित हो सकते हैं।
फर्नीचर खरीदने के लिए शासन से मांगा बजट
बेसिक शिक्षा विभाग ने 111 विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए शासन को बजट की मांग भेजी है। विभाग ने इन विद्यालयों के करीब सात हजार विद्यार्थियों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 2,336 बेंच की आवश्यकता बताई है।
फिलहाल बजट स्वीकृति के संबंध में कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी विद्यालयों को एक साथ फर्नीचर मिलेगा या खरीद की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।बजट स्वीकृत होने के बाद फर्नीचर की खरीद और विद्यालयों में वितरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
मुफ्त सुविधाओं के बावजूद बुनियादी कमी
सरकारी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाएं विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई में आर्थिक बाधाओं को कम करना और विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति को प्रोत्साहित करना है।लेकिन विद्यालयों में पर्याप्त फर्नीचर का होना भी जरूरी है। इस कमी को दूर करने से छात्रों के लिए अधिक सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।बजट मिलने पर सात हजार बच्चों को मिलेगी राहत
जिले के 111 विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था होने से करीब सात हजार विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्हें टाट-पट्टी और चटाई के स्थान पर बेंच पर बैठकर पढ़ाई करने का अवसर मिल सकेगा।हालांकि, अभी विभाग ने केवल बजट की मांग किए जाने की जानकारी दी है। इसलिए फर्नीचर मिलने की समयसीमा स्पष्ट नहीं है।
शिक्षा व्यवस्था के सामने महत्वपूर्ण चुनौती
जिले में 1,254 परिषदीय विद्यालयों का संचालन और एक लाख से अधिक बच्चों का पंजीकरण शिक्षा व्यवस्था के व्यापक दायरे को दर्शाता है। ऐसे में प्रत्येक विद्यालय में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।\111 विद्यालयों में फर्नीचर की कमी सामने आने के बाद शासन से बजट स्वीकृति और उसकी समयबद्ध उपलब्धता महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलहाल इन विद्यालयों के करीब सात हजार बच्चे टाट-पट्टी और चटाई पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। अब यह देखना होगा कि शासन से बजट मिलने और फर्नीचर की खरीद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यार्थियों को कब तक बेहतर बैठने की सुविधा मिल पाती है।