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नई दिल्ली। देशभर में सरकारी बैंकों की भर्ती परीक्षाओं में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पांच साल पुराने परीक्षा रिकॉर्ड, उम्मीदवारों की तस्वीरों और आंखों के बायोमेट्रिक स्कैन की जांच के जरिए ऐसे उम्मीदवारों की पहचान की है, जिन पर दूसरे व्यक्तियों को अपनी जगह परीक्षा में बैठाकर नौकरी हासिल करने का आरोप है। जांच में कुल 257 संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान हुई है। इनमें से कई उम्मीदवार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में नौकरी कर रहे थे। सीबीआई ने इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 135 लोगों को प्राथमिकी में आरोपित बनाया गया है।
इस खुलासे के बाद बैंकिंग क्षेत्र की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसी ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों में कार्रवाई की है। मध्य प्रदेश में ग्रामीण बैंक के 19 कर्मचारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
पांच साल पुराने रिकॉर्ड से खुला फर्जीवाड़े का राज
जानकारी के अनुसार, इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन यानी आईबीपीएस ने वर्ष 2020 से 2024 के बीच आयोजित बैंक भर्ती परीक्षाओं के पुराने रिकॉर्ड की दोबारा जांच की थी।इस दौरान उम्मीदवारों की तस्वीरों, फिंगरप्रिंट और आंखों के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड का मिलान किया गया। जांच में कई उम्मीदवारों के दस्तावेजों और बायोमेट्रिक पहचान के बीच अंतर सामने आया।
इसके बाद संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। जांच में कुल 257 उम्मीदवारों को संदिग्ध पाया गया।पड़ताल में यह आशंका सामने आई कि कई उम्मीदवारों ने स्वयं परीक्षा देने के बजाय अपनी जगह दूसरे व्यक्तियों को परीक्षा केंद्र पर भेजा था।172 लोगों को नौकरी दिलाने में डमी उम्मीदवारों की भूमिकाजांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य वास्तविक उम्मीदवारों के स्थान पर भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते थे।
सीबीआई से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, 54 कथित डमी उम्मीदवारों ने दो या उससे अधिक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देकर 172 लोगों को बैंक की नौकरी हासिल करने में मदद की थी।इसके अतिरिक्त आठ अन्य कथित डमी उम्मीदवारों द्वारा आठ उम्मीदवारों के स्थान पर परीक्षा देने का मामला भी सामने आया है।जांच में कुल 180 नौकरी प्राप्त उम्मीदवारों के संदिग्ध चयन का उल्लेख किया गया है। इनमें से 135 के नाम अगस्त में दर्ज प्राथमिकी में शामिल किए गए थे।
सीबीआई ने चार आरोपितों को किया गिरफ्तार
बैंक भर्ती फर्जीवाड़े के मामले में सीबीआई की मुंबई स्पेशल टास्क ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है।जांच एजेंसी ने विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर चार प्रमुख आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग का एक निरीक्षक भी शामिल है।
सीबीआई के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित बैंक भर्ती परीक्षाओं में दूसरे उम्मीदवारों की पहचान का इस्तेमाल करके शामिल होने वाले गिरोह से जुड़े थे।चारों आरोपितों पर भर्ती परीक्षा और साक्षात्कार सहित चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में धोखाधड़ी करने का आरोप है।जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
फोटो और फिंगरप्रिंट से कैसे किया गया फर्जीवाड़ा?
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपितों ने भर्ती परीक्षा की पहचान सत्यापन प्रक्रिया को धोखा देने के लिए कई तरीके अपनाए।कुछ मामलों में वास्तविक उम्मीदवार और डमी उम्मीदवार की तस्वीरों को मिलाकर बदली हुई तस्वीरों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।फिंगरप्रिंट जांच में भी हेरफेर किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग मामलों में इस्तेमाल की गई तकनीकों की भूमिका जांच का विषय है।बताया गया है कि कुछ डमी उम्मीदवार परीक्षा के अलावा साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में भी शामिल हुए।
इसके बाद अंतिम चयन होने पर वास्तविक उम्मीदवार नौकरी ज्वाइन करने पहुंच गया। पुराने बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की दोबारा जांच में पहचान संबंधी अंतर सामने आने से मामला खुला।
आंखों के आइरिस स्कैन ने खोली पोल
इस पूरे मामले में आंखों के आइरिस स्कैन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।आइरिस स्कैन एक बायोमेट्रिक पहचान तकनीक है, जिसमें आंख की पुतली के आसपास मौजूद रंगीन हिस्से के विशिष्ट पैटर्न का इस्तेमाल पहचान सत्यापन के लिए किया जाता है।जांच के दौरान परीक्षा के समय दर्ज किए गए बायोमेट्रिक रिकॉर्ड का मिलान किया गया।
कुछ रिकॉर्ड ऐसे व्यक्तियों से मेल खाने की बात सामने आई, जो वास्तविक चयनित उम्मीदवारों से अलग थे।इससे जांच एजेंसी को कथित पहचान बदलकर परीक्षा देने वाले नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
मध्य प्रदेश में 19 बैंक कर्मचारी निलंबित
बैंक भर्ती फर्जीवाड़े का असर नौकरी कर रहे कर्मचारियों पर भी पड़ने लगा है।रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में ग्रामीण बैंक के 19 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।आईबीपीएस ने संदिग्ध परीक्षा अनियमितताओं से संबंधित उम्मीदवारों के खिलाफ परीक्षा में शामिल होने पर आजीवन प्रतिबंध की कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी दी है।संबंधित बैंकों को सेवा नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, किसी कर्मचारी का निलंबन आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अंतिम विभागीय और कानूनी निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।
20 अगस्त को दर्ज हुई थी प्राथमिकी
सीबीआई ने आईबीपीएस की शिकायत के आधार पर 20 अगस्त 2026 को मामला दर्ज किया था।इस प्राथमिकी में 135 चयनित उम्मीदवारों समेत अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की जांच शुरू की गई।जांच में भारतीय दंड संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।सीबीआई के अनुसार, यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और बैंक भर्ती की निष्पक्ष प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा था।मेहनती उम्मीदवारों के अधिकारों पर सवालइस फर्जीवाड़े ने उन लाखों युवाओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो सरकारी बैंक में नौकरी पाने के लिए कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
आईबीपीएस के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में विभिन्न पदों पर भर्ती की जाती है।यदि किसी उम्मीदवार की जगह दूसरा व्यक्ति परीक्षा देकर उसे नौकरी दिलाता है तो इससे योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।इसलिए इस तरह के मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण है।
देशभर में अन्य संदिग्ध कर्मचारियों की तलाश
सीबीआई अब इस मामले में अन्य संदिग्ध उम्मीदवारों और कथित डमी अभ्यर्थियों की भूमिका की जांच कर रही है।जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी तरीके से परीक्षा देने और बैंक की नौकरी हासिल करने की प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे।इसके अलावा संदिग्ध चयन से जुड़े पुराने दस्तावेजों और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है और 135 व्यक्तियों को प्राथमिकी में आरोपित बनाया गया है। इस मामले में आगे की जांच से नेटवर्क के विस्तार और अन्य व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
बैंक भर्ती परीक्षाओं में सामने आया यह मामला दर्शाता है कि पुराना डिजिटल और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड भी भर्ती प्रक्रिया की अनियमितताओं का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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