Lucknow लखनऊ : उत्तर प्रदेश के हजारों उचित दर विक्रेताओं यानी कोटेदारों के लिए राहत भरी खबर है। पिछले करीब पांच वर्षों से अपने बकाये भुगतान का इंतजार कर रहे प्रदेश के 70 हजार से अधिक कोटेदारों को जल्द ही उनका पैसा मिल सकता है। खाद्य एवं रसद विभाग ने कोटेदारों के लंबित भुगतान को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी है। विभाग ने बकाये की पूरी जानकारी जुटाने का काम शुरू कर दिया है, जिसके बाद भुगतान की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के कोटेदारों का करीब 200 करोड़ रुपये का बकाया लंबे समय से लंबित है। इस भुगतान को लेकर कोटेदार लगातार सचिवालय और जवाहर भवन के चक्कर लगा रहे थे। कोटेदार संगठनों की ओर से कई बार विभागीय अधिकारियों और सरकार के सामने अपनी समस्या रखी गई थी। अब खाद्य एवं रसद विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया है।
विभागीय मंत्री मनोज पांडे के कड़े रुख के बाद अधिकारियों ने बकाया भुगतान की प्रक्रिया में तेजी दिखाई है। खाद्य एवं रसद विभाग के अपर आयुक्त ने प्रदेश के सभी संभागीय वित्त एवं लेखाधिकारियों से कोटेदारों के बकाये का पूरा विवरण मांगा है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे लंबित भुगतान से जुड़ी सभी जानकारियां जल्द उपलब्ध कराएं, ताकि वास्तविक बकाये का आकलन कर भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
दरअसल, यह मामला वर्ष 2021 से जुड़ा हुआ है। नवंबर 2021 में कोटेदारों ने गेहूं और चावल समेत खाद्यान्न का उठान करने के लिए निर्धारित राशि पहले ही जमा कर दी थी। इसके बाद खाद्यान्न का वितरण शुरू होने से पहले ही सरकार की ओर से मुफ्त खाद्यान्न वितरण योजना लागू कर दी गई। योजना लागू होने के कारण कोटेदारों द्वारा जमा कराई गई खाद्यान्न की राशि का समायोजन नहीं हो सका और उनका पैसा लंबे समय तक फंसा रहा।
कोटेदारों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूंजी लगाकर खाद्यान्न का उठान किया था, लेकिन योजना में बदलाव के बाद वह राशि वापस नहीं मिल सकी। पिछले कई वर्षों से कोटेदार संगठन इस भुगतान की मांग कर रहे थे। कई बार प्रतिनिधिमंडल बनाकर अधिकारियों से मुलाकात की गई और ज्ञापन भी सौंपे गए। इसके बावजूद भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।
हाल ही में कोटेदारों के विभिन्न संगठनों ने खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडे से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी थी। उन्होंने मंत्री से मांग की थी कि लंबे समय से रुके हुए भुगतान को जल्द जारी कराया जाए, ताकि कोटेदारों को आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सके। मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
विभागीय स्तर पर अब बकाये का सत्यापन किया जा रहा है। सभी जिलों और संभागों से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की गलती या देरी की संभावना को खत्म किया जा सके। माना जा रहा है कि विवरण मिलने के बाद जल्द ही कोटेदारों के खातों में बकाये की राशि ट्रांसफर की जा सकती है।
कोटेदारों को उम्मीद है कि सरकार की इस पहल से उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा। आर्थिक दबाव झेल रहे हजारों उचित दर विक्रेताओं के लिए यह भुगतान बड़ी राहत साबित हो सकता है। विभाग का प्रयास है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिना किसी अनावश्यक देरी के बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।