हापुड़। जिले में पनीर की बढ़ती मांग के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। विभाग की जांच के दौरान 18 पनीर निर्माण इकाइयां ऐसी मिलीं, जो रोजाना बड़ी मात्रा में पनीर तैयार कर रही थीं, लेकिन वह यह बताने में असमर्थ रहीं कि उत्पादन के लिए दूध कहां से खरीदा जा रहा है।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने जब इन इकाइयों से पनीर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले दूध की खरीद से जुड़े दस्तावेज मांगे तो कई फर्में कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इसके बाद विभाग ने संबंधित इकाइयों को नोटिस जारी कर दूध खरीद और पनीर उत्पादन का पूरा विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कुछ इकाइयां बड़े स्तर पर पनीर का उत्पादन कर रही थीं, लेकिन उनके पास कच्चे माल यानी दूध की खरीद का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं था। इससे पनीर की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है। खासकर दूध और उससे बने उत्पादों के मामले में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।

विभाग की जांच में केवल रिकॉर्ड की कमी ही नहीं, बल्कि पनीर निर्माण के स्थानों की स्थिति को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। कई इकाइयों में पनीर का उत्पादन तालाबों के किनारे, कबाड़ के ढेर के पास और बदबूदार स्थानों पर होता पाया गया।

अधिकारियों के अनुसार, खाद्य पदार्थों का निर्माण साफ-सफाई और स्वच्छ वातावरण में होना चाहिए। गंदे स्थानों पर तैयार किए जा रहे पनीर से लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जांच के दौरान निर्माण स्थल की स्थिति, साफ-सफाई, कच्चे माल की गुणवत्ता और उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी जुटाई।

पनीर की मांग त्योहारों और शादियों के मौसम में काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में बाजार में बड़ी मात्रा में पनीर की आपूर्ति होती है। इसी को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने पनीर निर्माण इकाइयों की जांच तेज की है।

अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद अब संबंधित फर्मों से उत्पादन क्षमता, दूध खरीद का स्रोत, प्रतिदिन तैयार होने वाले पनीर की मात्रा और बिक्री से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।

यदि जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित इकाइयों पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जुर्माना लगाने से लेकर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई तक शामिल हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दूध से बने उत्पादों में गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि खराब गुणवत्ता वाला पनीर स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

स्थानीय लोगों ने भी खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का समर्थन किया है। उनका कहना है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए।

विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि वे संदिग्ध खाद्य सामग्री की बिक्री या गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत होने पर तुरंत जानकारी दें।

फिलहाल 18 पनीर निर्माण इकाइयों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। विभाग की आगे की कार्रवाई इन इकाइयों की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।

खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई से जिले में पनीर निर्माण और बिक्री से जुड़े कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

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