गाजियाबाद में केमिकल से टोफू बनाने का भंडाफोड़ 62 किलो माल जब्त
सेहत से खिलवाड़ गाजियाबाद में 62 किलो संदिग्ध टोफू जब्त
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान टोफू बनाने में कथित रूप से केमिकल के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा टीम ने निर्माण स्थल पर छापेमारी कर करीब 62 किलो टोफू जब्त किया। अधिकारियों ने टोफू और इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं।
कार्रवाई के दौरान टीम ने टोफू तैयार करने की प्रक्रिया और वहां रखी सामग्री की जांच की। अधिकारियों को संदेह हुआ कि उत्पादन में ऐसी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी खाद्य पदार्थ तैयार करने में अनुमति या निर्धारित मात्रा की पुष्टि जरूरी है। इसके बाद तैयार टोफू को जब्त कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टोफू में किस तरह के पदार्थ मौजूद थे और वे स्वास्थ्य के लिए कितने नुकसानदायक हो सकते थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित संचालक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
टोफू सोयाबीन से तैयार किया जाने वाला खाद्य उत्पाद है और प्रोटीन के स्रोत के रूप में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। शाकाहारी और वीगन डाइट अपनाने वाले लोगों के बीच इसकी मांग अधिक है। बढ़ती मांग के बीच खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग, निर्माण और एक्सपायरी डेट की जांच जरूर करें। खुले या संदिग्ध खाद्य पदार्थों को खरीदने से बचें और किसी उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित विभाग को सूचना दें।
विभाग की ओर से बाजार में मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। दुकानों, गोदामों और निर्माण इकाइयों से नमूने लेकर उनकी जांच कराई जाती है। मानकों के अनुरूप उत्पाद नहीं मिलने पर जुर्माने से लेकर अन्य कानूनी कार्रवाई तक की जा सकती है। गाजियाबाद में सामने आए इस मामले के बाद टोफू निर्माण इकाइयों और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता बढ़ने की संभावना है। फिलहाल जब्त किए गए 62 किलो टोफू के नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही कथित केमिकल के इस्तेमाल और उसकी प्रकृति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।