उत्तरप्रदेश  श्रीरामजन्म भूमि का 70 एकड़ परिसर 108 एकड़ में विस्तारित हो चुका है लेकिन रामलला के जन्मस्थल के कारण मूल मंदिर के पूर्व प्रस्तावित मॉडल में चाह कर भी बड़ा बदलाव नहीं हो सका. उधर निर्माणाधीन मंदिर के चारों ओर आयताकार परकोटे का भी विस्तार किया गया लेकिन यह भी आठ एकड़ में ही सीमित हो गया है.
इस बीच भूमि पूजन के बाद से जिस प्रकार यहां श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ी है, उससे भविष्य में आने वाली भीड़ का अनुमान करने पर मंदिर के बाह्य परिसर को बढ़ाने की संभावना पर फिर से मंथन शुरू हो गया है. इसके चलते परिसर के मास्टर प्लान में भी बदलाव की गुंजाइश तलाशी जा रही है.
गोपुरम के निर्माण के लिए चयनित स्थल पर अभी फंसा है पेंच इस बारे में श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डा. अनिल मिश्र ने बताया कि बदलाव की संभावना वहीं तलाशी जा सकती है, जहां स्ट्रक्चर का निर्माण नहीं हुआ हो, जब स्ट्रक्चर तैयार हो गया है तो उसे तोड़कर नया बनाने का अब वक्त ही नहीं है. अब पहली प्राथमिकता शीघ्र भूतल का निर्माण पूरा कर नियत तिथि पर रामलला के प्राण प्रतिष्ठा की है. ऐसी स्थिति में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं हो सकता. जितना होना था, वह पहले ही किया जा चुका है. डा. मिश्र का कहना है कि निर्माणाधीन मंदिर में एक दिन में करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं.
मंदिर के गूढ़ी मंडप, रंग मंडप व नृत्य मंडप को मिलाकर प्रार्थना या आरती दर्शन के लिए एक साथ पांच हजार श्रद्धालु खड़े हो सकते हैं. इसी तरह परकोटे के क्षेत्रफल में भी एक साथ 50 हजार श्रद्धालु खड़े हो सकते हैं. यह सभी श्रद्धालु परकोटे में प्रस्तावित मार्ग से ही मंदिर में प्रवेश करेंगे.
यहां प्रस्तावित गोपुरम की जगह को लेकर बातचीत हो रही है लेकिन अभी बात पूरी तरह बनी नहीं इसलिए प्राण प्रतिष्ठा से पहले इसका निर्माण स्थगित कर दिया गया है.
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