बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर मेडिकल कॉलेज में लिफ्ट खराब होने के कारण एक डायटीशियन करीब आधे घंटे तक अंदर फंसी रहीं। लिफ्ट में बंद होने के बाद उन्होंने मदद के लिए सायरन बजाया, लेकिन काफी देर तक कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। इस दौरान घबराहट और दम घुटने जैसी स्थिति के कारण वह बेहोश हो गईं। घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े हो गए हैं।  मेडिकल कॉलेज में तैनात डायटीशियन रोज की तरह अपने काम के लिए लिफ्ट से जा रही थीं। इसी दौरान अचानक लिफ्ट बीच रास्ते में बंद हो गई और वह अंदर ही फंस गईं। उन्होंने तुरंत मदद के लिए लिफ्ट में लगे इमरजेंसी सायरन का इस्तेमाल किया, लेकिन काफी समय तक कोई सहायता नहीं पहुंची।

लिफ्ट में बढ़ती रही घबराहट
डायटीशियन ने बताया कि लिफ्ट बंद होने के बाद उन्होंने कई बार सायरन बजाया और मदद के लिए आवाज लगाई। लेकिन कोई कर्मचारी या सुरक्षा गार्ड समय पर नहीं पहुंचा। बंद जगह में लंबे समय तक रहने से उनकी हालत बिगड़ने लगी और वह बेहोश हो गईं। काफी देर बाद जब लोगों को इसकी जानकारी हुई तो लिफ्ट को खोलकर उन्हें बाहर निकाला गया। इसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने उनका इलाज किया। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन में भी हड़कंप मच गया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
मेडिकल कॉलेज जैसी जगह पर लिफ्ट की खराबी और आपातकालीन व्यवस्था में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों, कर्मचारियों और अधिकारियों के आने-जाने के लिए इस्तेमाल होने वाली लिफ्ट की नियमित जांच और रखरखाव कितना जरूरी है, यह घटना एक बार फिर दिखाती है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सायरन की आवाज पर कार्रवाई होती तो डायटीशियन को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
जांच के निर्देश
घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले की जानकारी ली है। लिफ्ट की तकनीकी जांच और लापरवाही की स्थिति का पता लगाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। यह भी जांच की जा रही है कि इमरजेंसी सायरन बजने के बावजूद मदद पहुंचने में देरी क्यों हुई। अस्पताल प्रशासन की ओर से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लिफ्ट व्यवस्था को बेहतर करने और कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है। फिलहाल इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है।
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