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हिमाचल प्रदेश
पति का पैर कटा तो पत्नी ने मांगा तलाक कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
nidhi
26 Aug 2026 7:50 AM IST

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पति की दिव्यांगता बनी तलाक
शिमला: हिमाचल प्रदेश के एक मामले में अदालत ने मानवीय संवेदनाओं और वैवाहिक जिम्मेदारियों को लेकर अहम टिप्पणी की है। पति का पैर कट जाने के बाद पत्नी की ओर से दायर तलाक याचिका को फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जीवन की कठिन परिस्थितियों और विपदा के समय अपने साथी का साथ छोड़ना तलाक का उचित आधार नहीं हो सकता। मामला हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर फैमिली कोर्ट से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, पति एक हादसे में अपना पैर गंवा बैठा था। इसके बाद पत्नी ने उससे अलग होने की इच्छा जताते हुए तलाक की मांग की थी। पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने वैवाहिक संबंधों और पति-पत्नी के कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया।
मुश्किल समय में साथ देना जरूरी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विवाह केवल अच्छे समय में साथ रहने का वादा नहीं है, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का सहारा बनने की जिम्मेदारी है। किसी बीमारी, दुर्घटना या शारीरिक परेशानी के कारण साथी को छोड़ देना वैवाहिक रिश्ते की भावना के विपरीत है। कोर्ट ने माना कि पति के साथ हुई दुर्घटना एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, लेकिन यह स्थिति तलाक का आधार नहीं बन सकती। अदालत ने कहा कि ऐसे समय में जीवनसाथी से सहयोग और संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
पत्नी ने मांगा था तलाक
मामले में पत्नी ने पति से अलग होने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उसका कहना था कि पति के पैर कटने के बाद परिस्थितियां बदल गई हैं और वह इस रिश्ते को आगे नहीं निभा सकती। हालांकि अदालत ने पत्नी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और तलाक की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करना दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है।
फैसले की हो रही चर्चा
फैमिली कोर्ट के इस फैसले की काफी चर्चा हो रही है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत ने इस मामले में विवाह संस्था, मानवीय मूल्यों और पति-पत्नी के पारस्परिक दायित्वों को महत्व दिया है। अदालत का यह फैसला उन मामलों में एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जहां जीवनसाथी किसी गंभीर परेशानी या बीमारी से गुजर रहा हो।
रिश्तों में संवेदनशीलता पर जोर
कोर्ट ने अपने फैसले के जरिए यह स्पष्ट किया कि शादी सिर्फ सुविधाओं और परिस्थितियों पर आधारित रिश्ता नहीं है। जीवन में आने वाली परेशानियों के दौरान एक-दूसरे का साथ देना वैवाहिक संबंधों की बुनियाद है। हिमाचल के इस मामले में अदालत ने तलाक की मांग को खारिज करते हुए कहा कि विपदा के समय साथी को छोड़ना रिश्ते की जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने जैसा है।
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