खुले नाले में डूबी चारू का शव पांचवें दिन बरामद, काली नदी में झाड़ियों में फंसा मिला
बागपत। 28 जुलाई को खुले नाले में डूबने के बाद लापता हुई चारू की तलाश का अभियान पांचवें दिन शनिवार को खत्म हुआ। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी गाजियाबाद, नगर पालिका की टीम और बागपत के गोताखोरों की लगातार कोशिशों के बाद चारू का शव बरामद कर लिया गया।
शनिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे बागपत से पहुंची गोताखोरों की टीम ने काली नदी में चावली गांव के पास झाड़ियों में फंसे चारू के शव को खोज निकाला। बागपत के गोताखोर इरफान की टीम ने काफी मशक्कत के बाद शव को नदी से बाहर निकाला।
चारू के लापता होने के बाद से ही परिजन परेशान थे और उसकी तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा था। घटना के बाद प्रशासन ने विभिन्न बचाव दलों को मौके पर लगाया था। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी लगातार नदी और नाले के आसपास तलाशी अभियान चला रही थीं।
रेस्क्यू टीमों ने कई दिनों तक पानी के बहाव वाले क्षेत्रों, नालों और नदी के किनारों पर खोजबीन की। तेज बहाव और नदी में मौजूद झाड़ियों के कारण बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद टीमों ने तलाश अभियान जारी रखा।
शनिवार सुबह गोताखोरों को काली नदी में चावली गांव के निकट झाड़ियों में कुछ फंसा हुआ दिखाई दिया। जांच करने पर वह चारू का शव निकला। शव मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
चारू का शव बरामद होने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। कई दिनों से बेटी की तलाश में जुटे परिवार को शव मिलने की सूचना से गहरा सदमा पहुंचा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान में कई विभागों की टीमें लगातार काम कर रही थीं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी गाजियाबाद, नगर पालिका और स्थानीय गोताखोरों ने मिलकर तलाशी अभियान चलाया।
घटना के बाद खुले नालों और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में खुले नाले और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन की ओर से घटना की जांच और आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में खुले नालों, नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें।
चारू की तलाश में जुटी टीमों के लिए यह अभियान चुनौतीपूर्ण रहा। कई दिनों तक लगातार प्रयास करने के बाद शव मिलने से बचाव दलों ने राहत की सांस ली, लेकिन परिवार के लिए यह घटना दुखद अंत लेकर आई।
इस हादसे ने एक बार फिर मानसून के दौरान सुरक्षा इंतजामों की जरूरत को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि खुले नालों और जलभराव वाले इलाकों की नियमित निगरानी और सुरक्षा उपायों से ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है।