Banda : बिजली विभाग की टीम पर हमला, जेई समेत पांच कर्मचारियों को बंधक बनाकर पीटा

Update: 2026-07-16 04:05 GMT

बांदा  : उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बिजली चोरी की जांच और पूर्व में लगाए गए जुर्माने की वसूली के लिए गई बिजली विभाग की टीम पर ग्रामीणों द्वारा किए गए हमले ने प्रशासन को झकझोर कर रख दिया। अतर्रा थाना क्षेत्र के बरेहंडा गांव में बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट, बंधक बनाने और गैस सिलेंडर खोलकर जिंदा जलाने की कोशिश का मामला सामने आया है। घटना के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इनमें पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

जानकारी के अनुसार बिजली विभाग की टीम पूर्व में बिजली चोरी के मामलों में लगाए गए जुर्माने की वसूली तथा क्षेत्र में दोबारा बिजली चोरी की शिकायतों की जांच के लिए बरेहंडा गांव पहुंची थी। टीम में तीन जूनियर इंजीनियर (जेई) सहित विभाग के कई कर्मचारी शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान कुछ घरों में बिजली कनेक्शन और मीटर की जांच की जा रही थी। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, विरोध कर रहे लोगों ने टीम को घेर लिया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि ग्रामीणों ने तीन जेई और दो कर्मचारियों को जबरन एक मकान के भीतर बंद कर दिया और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। इस दौरान कर्मचारियों को लात-घूंसों और डंडों से पीटा गया, जिससे कई लोग घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारियों और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि हमलावरों ने कमरे में रखे गैस सिलेंडर का रेगुलेटर खोल दिया और कर्मचारियों को जिंदा जलाने का प्रयास किया। हालांकि किसी तरह स्थिति बिगड़ने से पहले पुलिस और अन्य लोगों के पहुंचने पर कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यदि समय रहते बचाव नहीं होता तो घटना बड़ा हादसा बन सकती थी। घायल कर्मचारियों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया।

घटना के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने इसे सरकारी कार्य में बाधा डालने और सरकारी कर्मचारियों पर सुनियोजित हमला बताया। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली चोरी के खिलाफ अभियान सरकार की प्राथमिकता है और इस तरह की घटनाएं कर्मचारियों का मनोबल गिराने का प्रयास हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी रोकने और राजस्व वसूली का अभियान आगे भी जारी रहेगा तथा दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस ने बिजली विभाग की तहरीर के आधार पर पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट, जान से मारने की कोशिश, बंधक बनाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जबकि फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। घटना स्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। यदि जांच में गैस सिलेंडर खोलकर कर्मचारियों को जलाने की कोशिश के आरोपों की पुष्टि होती है, तो आरोपियों के खिलाफ और भी गंभीर धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। पुलिस ने गांव में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है ताकि किसी प्रकार का तनाव या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।

घटना के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों में भी आक्रोश व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकारी आदेशों के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाने गांव पहुंचे थे, लेकिन उनके साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने भविष्य में ऐसे अभियानों के दौरान पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि कर्मचारी बिना भय के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव में बिजली चोरी को लेकर पहले भी कई बार विभाग और ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति बन चुकी है। हालांकि इस बार मामला हिंसक हो गया, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि बिजली चोरी रोकना और राजस्व की वसूली कानून के तहत की जाने वाली नियमित कार्रवाई है, जिसका विरोध हिंसा के माध्यम से करना गंभीर अपराध है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है। हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और अन्य फरार लोगों की तलाश जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं बिजली विभाग ने भी संकेत दिए हैं कि जिले में बिजली चोरी के खिलाफ विशेष अभियान पहले की तरह जारी रहेगा और किसी भी प्रकार के दबाव या हिंसा के कारण सरकारी कार्रवाई नहीं रोकी जाएगी।

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