अलीगढ़ : मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की जमीन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। अलीगढ़ नगर निगम ने यूनिवर्सिटी की राइडिंग फील्ड से जुड़ी जमीन को लेकर कार्रवाई करते हुए कब्जा हटाने का दावा किया है। प्रशासन के अनुसार, यह जमीन करोड़ों रुपये मूल्य की है और लंबे समय से इसे लेकर विवाद चल रहा था। इस कार्रवाई के बाद नगर निगम और एएमयू प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जिस जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है, वह सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित थी। प्रशासन के मुताबिक, जमीन पर अनधिकृत तरीके से उपयोग किया जा रहा था, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई। इस जमीन की कीमत करीब 500 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
मामला एएमयू की राइडिंग फील्ड से जुड़ी जमीन का है, जहां घुड़सवारी प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियां संचालित होती रही हैं। प्रशासन की कार्रवाई के बाद इस जमीन के स्वामित्व और उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम का दावा है कि उसने सरकारी रिकॉर्ड और नियमों के आधार पर कदम उठाया है, जबकि यूनिवर्सिटी की ओर से इस मामले में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं।
जमीन विवाद कोई नया मामला नहीं है। एएमयू और आसपास की कई संपत्तियों को लेकर पहले भी प्रशासन और यूनिवर्सिटी के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। कई बार जमीन के स्वामित्व, रिकॉर्ड और उपयोग को लेकर कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया गया है। इस बार राइडिंग फील्ड की जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद भी अब बड़े मुद्दे में बदलता दिखाई दे रहा है।
नगर निगम की कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे एएमयू से जुड़े मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप के तौर पर देख रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसी नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। वहीं, यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी भी निर्णय से पहले सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
राइडिंग फील्ड की जमीन को लेकर अब आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि यूनिवर्सिटी प्रशासन इस कार्रवाई को चुनौती देता है तो मामला कानूनी रास्ते पर भी जा सकता है। फिलहाल प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को नियमों के तहत बताया है और जमीन को अपने नियंत्रण में लेने की बात कही है।
एएमयू देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शामिल है और इससे जुड़े किसी भी विवाद का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिलता है। यही वजह है कि 500 करोड़ रुपये की बताई जा रही इस जमीन की कार्रवाई ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। आने वाले दिनों में इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से और बयान सामने आने की संभावना है।