गोरखपुर। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष **अजय राय** गुरुवार को गोरखपुर पहुंचे। उनका दौरा राजघाट स्थित गुरु श्री गोरक्षनाथ घाट पर गुंबदनुमा छत का स्लैब गिरने से जान गंवाने वाले अधिवक्ताओं के परिवारों से मुलाकात से जुड़ा है। हादसे और घाट पर हुए निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने इसे भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है। वहीं प्रशासन ने निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच शुरू कराई है और विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।
राजघाट हादसे के बाद यह मामला केवल दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा। नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी राप्ती तट पर हुए निर्माण की गुणवत्ता और जर्जर पिलरों को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए। कुछ पार्षदों ने सिंचाई विभाग के काम को लेकर निंदा प्रस्ताव तक लाने की मांग की। ऐसे माहौल में अजय राय के गोरखपुर दौरे ने मामले को राजनीतिक रंग भी दे दिया है।
पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे अजय राय
कांग्रेस की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक अजय राय गुरुवार सुबह लखनऊ से गोरखपुर के लिए रवाना हुए। उनका कार्यक्रम राप्तीनगर फेज-चार स्थित स्पोर्ट्स कॉलेज के पीछे पहुंचकर अधिवक्ता **आलोक अस्थाना** के परिवार से मिलने का था। इसके बाद उन्हें शाहपुर क्षेत्र की शक्तिनगर कॉलोनी जाकर अधिवक्ता **संजय सिंह** के परिजनों से मुलाकात करनी थी।
कांग्रेस इस हादसे को लेकर शुरुआत से सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रही है। पार्टी की तरफ से निर्माण की गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
अजय राय का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र है। ऐसे में कांग्रेस इस घटना के जरिए सरकार के भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे को घेरने की कोशिश कर रही है।
राजघाट पर आखिर हुआ क्या था?
गोरखपुर में राप्ती नदी किनारे स्थित गुरु श्री गोरक्षनाथ घाट पर रविवार को बड़ा हादसा हुआ था। यहां गुंबदनुमा छत का स्लैब अचानक गिर गया था। मलबे की चपेट में आए अधिवक्ताओं को अस्पताल ले जाया गया। हादसे के बाद मौत और घायलों के उपचार को लेकर भी सवाल उठे।
शुरुआती स्तर पर हादसे के पीछे आकाशीय बिजली का प्रभाव भी बताया गया, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया। अब विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि संरचना के गिरने की वास्तविक वजह क्या थी।
इसलिए अभी यह तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता कि गुंबद केवल भ्रष्टाचार या घटिया निर्माण के कारण ही गिरा। यह कांग्रेस और कुछ स्थानीय प्रतिनिधियों की ओर से लगाया गया आरोप है, जबकि अंतिम कारण तकनीकी जांच के बाद स्पष्ट होगा।
कांग्रेस ने भ्रष्टाचार से जोड़ा हादसा
हादसे के बाद कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने भी सरकार पर हमला किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये की लागत से विकसित घाट पर ऐसी संरचना का गिरना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कांग्रेस नेता ने इसे मुख्यमंत्री के गृह जनपद में भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
अब अजय राय के दौरे से कांग्रेस ने इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर उठाने का संकेत दिया है।
कांग्रेस का राजनीतिक तर्क है कि सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन सरकारी या सार्वजनिक निर्माण से जुड़ी घटनाएं उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।
हालांकि निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ या नहीं, यह जांच का विषय है और फिलहाल किसी एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट ने इसे स्थापित नहीं किया है।
नगर निगम की बैठक में भी उठा निर्माण का मुद्दा
राजघाट पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल केवल विपक्ष की तरफ से नहीं उठे हैं। गोरखपुर नगर निगम बोर्ड की 22वीं बैठक में भी इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ।
पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने राप्ती तट पर हुए निर्माण और जर्जर पिलरों का मुद्दा उठाया। उन्होंने नगर निगम से सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर पिलरों की मरम्मत कराने की मांग की। पार्षद ऋषि मोहन ने सिंचाई विभाग के काम को लेकर निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की।
इस दौरान पार्षदों के बीच तीखी बहस भी हुई।
इस घटनाक्रम से इतना जरूर स्पष्ट है कि राप्ती तट पर हुए कुछ निर्माण कार्यों की स्थिति और गुणवत्ता को लेकर स्थानीय निकाय के भीतर भी चिंता मौजूद है।
विशेषज्ञ बताएंगे गुंबद क्यों गिरा
हादसे के बाद प्रशासन ने निर्माण सामग्री के नमूने लिए हैं। इनकी जांच की जा रही है।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि संरचना में कोई तकनीकी खामी थी या फिर किसी बाहरी कारण से गुंबद गिरा। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
यही रिपोर्ट इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण होगी।
अगर नमूनों की जांच में निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो निर्माण कराने वाली एजेंसी और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल बढ़ सकते हैं। वहीं अगर किसी प्राकृतिक कारण को हादसे की मुख्य वजह पाया जाता है तो तस्वीर अलग होगी।
इसलिए राजनीतिक आरोपों और जांच के अंतिम निष्कर्ष में अंतर रखना जरूरी है।
इलाज और एंबुलेंस को लेकर भी लगे आरोप
हादसे के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी विवाद हुआ।
रिपोर्टों के मुताबिक मृत अधिवक्ता की पत्नी की शिकायत पर स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। शिकायत में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराने और इलाज में देरी के आरोप लगाए गए। सीएमओ का नाम भी शिकायत में शामिल बताया गया।
अधिवक्ताओं ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
इस तरह राजघाट का मामला दो स्तरों पर जांच और सवालों के घेरे में है। पहला सवाल गुंबद गिरने और निर्माण की गुणवत्ता का है, जबकि दूसरा हादसे के बाद घायलों को मिली चिकित्सा सहायता से जुड़ा है।
योगी ने किया चार लाख की सहायता का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित परिवार के लिए **चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता** की घोषणा की गई।
प्रशासनिक अधिकारी भी हादसे के बाद मौके पर पहुंचे थे।
दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि आर्थिक सहायता के साथ यह पता लगाना भी जरूरी है कि हादसा क्यों हुआ और अगर किसी स्तर पर लापरवाही हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।
यही मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे पर कांग्रेस का वार
अजय राय पिछले कुछ दिनों से योगी सरकार पर लगातार हमलावर हैं। बुधवार को भी उन्होंने भाजपा सरकार पर विकास और रोजगार के मुद्दों पर विफल रहने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सरकार मूल समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए दूसरे विवादों को आगे बढ़ा रही है। ये कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें सरकार ने स्वीकार नहीं किया है।
राजघाट हादसे के बाद कांग्रेस को अब भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरने का नया मौका मिला है।
कांग्रेस यह सवाल उठा रही है कि जब मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में सार्वजनिक निर्माण की गुणवत्ता पर इस तरह सवाल खड़े हो रहे हैं तो प्रदेश के दूसरे हिस्सों की स्थिति क्या होगी।
भाजपा और सरकार की तरफ से इस राजनीतिक आरोप पर क्या विस्तृत जवाब आता है, इस पर भी नजर रहेगी।
श्मशान घाट की व्यवस्था को लेकर नया फैसला
इसी बीच गोरखपुर नगर निगम बोर्ड ने राजघाट अंत्येष्टि स्थल के संचालन के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP को मंजूरी दी है।
इसके तहत शवदाह व्यवस्था, साफ-सफाई, शुल्क और अभिलेखों के रखरखाव की जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। लावारिस और बेसहारा शवों के निशुल्क अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी इसमें शामिल है।
लकड़ी आधारित शवदाह के लिए संचालन संस्था को नगर निगम की तरफ से 1,800 रुपये और गैस आधारित शवदाह के लिए 1,000 रुपये प्रति शव भुगतान का प्रावधान किया गया है। हालांकि आम लोगों से लिए जाने वाले शुल्क को लेकर बोर्ड बैठक में पार्षदों ने सवाल उठाए। कुछ पार्षदों ने अंत्येष्टि की रसीद की राशि घटाने की मांग की।
इससे साफ है कि हादसे के साथ-साथ घाट की व्यवस्थाओं और संचालन पर भी स्थानीय स्तर पर बहस चल रही है।
दो परिवारों का दर्द बना बड़ा मुद्दा
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच इस घटना का सबसे गंभीर पहलू पीड़ित परिवारों का नुकसान है।
अजय राय का गोरखपुर पहुंचकर मृत अधिवक्ताओं के परिजनों से मिलना कांग्रेस की ओर से उनके साथ एकजुटता दिखाने की कोशिश है। कांग्रेस इस मामले में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और जिम्मेदारी तय करने की मांग को आगे बढ़ा सकती है।
दूसरी तरफ प्रशासन की जिम्मेदारी तकनीकी और आपराधिक जांच को पूरा करके हादसे का वास्तविक कारण सामने लाने की है।
यदि जांच में किसी विभाग, निर्माण एजेंसी या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।
भ्रष्टाचार या हादसा जांच से तय होगी असली वजह
राजघाट हादसे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल अभी अनुत्तरित है—गुंबद आखिर गिरा क्यों?
एक तरफ कांग्रेस और स्थानीय स्तर पर कुछ जनप्रतिनिधि निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी तरफ शुरुआती तौर पर आकाशीय बिजली जैसी वजह का उल्लेख भी सामने आया था। प्रशासन ने निर्माण सामग्री की जांच शुरू करा दी है।
इसलिए जांच रिपोर्ट आने से पहले इसे साबित भ्रष्टाचार कहना उचित नहीं होगा।
फिलहाल इतना तय है कि घटना ने गोरखपुर में सार्वजनिक निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और हादसे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की प्रतिक्रिया को सवालों के घेरे में ला दिया है।
मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में हुई इस घटना को कांग्रेस अब बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठाने की कोशिश कर रही है। अजय राय का गोरखपुर दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आने वाले दिनों में विशेषज्ञों की रिपोर्ट और जांच से यह स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे प्राकृतिक कारण था, निर्माण संबंधी तकनीकी खामी थी या किसी स्तर पर लापरवाही। उसी आधार पर कांग्रेस के भ्रष्टाचार के आरोपों और सरकार के जवाब की वास्तविक परीक्षा होगी।
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