पूर्व मंत्री के बेटे की मुश्किलें बढ़ीं भूरा पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
मेरठ : बसपा नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी के बेटे **फिरोज उर्फ भूरा** की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पड़ोसी के घर हथियार लेकर पहुंचने, धमकी देने और हंगामा करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए भूरा को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस उसके पुराने मुकदमों और गतिविधियों का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। वहीं इस पूरे विवाद में अपराध जगत से जुड़े बताए जा रहे सलमान गाजी गिरोह और हिस्ट्रीशीटर असलम पहलवान का नाम सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है।
पुलिस के सामने अब केवल भूरा के खिलाफ दर्ज ताजा मुकदमे की जांच नहीं है। घटना से जुड़े दूसरे लोगों, उनके आपसी संबंधों और हथियार लेकर आमने-सामने आने की परिस्थितियों को भी देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में भूरा की हिस्ट्रीशीट खोलने की कार्रवाई की बात सामने आई है, हालांकि इसका औपचारिक पुलिस आदेश उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट रूप से प्रकाशित नहीं हुआ है।
आधी रात हथियार लेकर पहुंचने का आरोप
पूरा मामला मेरठ के कोतवाली थाना क्षेत्र के सराय बहलीम इलाके का है। आरोप है कि सोमवार देर रात फिरोज उर्फ भूरा अपने दो साथियों के साथ हाजी सिराज के घर पहुंचा था। सिराज की तरफ से दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि भूरा और उसके साथियों ने गाली-गलौज की, घर का दरवाजा तोड़ने की कोशिश की और परिवार को धमकी दी।
घटना का वीडियो भी सामने आया। पुलिस के मुताबिक वायरल फुटेज में तीन युवक दिखाई दिए, जिनमें से एक के हाथ में हथियार नजर आया। शिकायत और वीडियो फुटेज के आधार पर फिरोज उर्फ भूरा और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए चार टीमें लगाई थीं। इसके बाद मंगलवार शाम फिरोज उर्फ भूरा को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके दो अन्य साथियों की तलाश भी शुरू की गई।
14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया भूरा
गिरफ्तारी के बाद भूरा को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे **14 दिन की न्यायिक हिरासत** में भेज दिया।
बचाव पक्ष ने मामले में पेश किए गए वीडियो और अन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दूसरे आरोपियों की तलाश जारी है।
यानी फिलहाल भूरा के खिलाफ लगे आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं। मामले की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया आगे चलेगी।
असलम पहलवान के घर पहुंचने का आरोप
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण नाम **असलम पहलवान** का सामने आया है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक असलम को कथित तौर पर सलमान गाजी का शूटर और हिस्ट्रीशीटर बताया गया है। इसी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि भूरा असलम पहलवान के घर पहुंचा और वहां पिस्टल से फायरिंग की। पुलिस ने भूरा को गिरफ्तार किया और उसके साथी अदनान की तलाश में दबिश दी।
हालांकि दूसरे मीडिया स्रोत घटना को मुख्य रूप से हथियार दिखाकर धमकी देने और घर में घुसने की कोशिश के रूप में रिपोर्ट कर रहे हैं। इसलिए फायरिंग संबंधी आरोप की अंतिम स्थिति पुलिस जांच और अदालत में पेश साक्ष्यों से स्पष्ट होगी।
10 लाख रुपये के लेनदेन से जुड़ी कहानी
घटना के पीछे पैसे के लेनदेन का विवाद होने की बात भी सामने आई है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार याकूब कुरैशी के भतीजे अनस कुरैशी की दोस्ती अदनान नाम के युवक से थी। आरोप है कि आगरा के एक व्यापारी के करीब 10 लाख रुपये एक एनर्जी ड्रिंक कारोबार में लगाए गए थे। व्यापारी ने रकम वापस मांगी तो विवाद बढ़ गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि व्यापारी ने रकम निकलवाने के लिए असलम पहलवान से संपर्क किया और असलम ने कथित तौर पर हिस्सेदारी पर रकम वसूलने की बात स्वीकार की। इसके बाद अदनान को कथित धमकियां मिलने लगीं।
पुलिस जांच में इन दावों की सत्यता और अलग-अलग पक्षों की भूमिका स्पष्ट होनी बाकी है।
अदनान पहुंचा था भूरा के पास
रिपोर्ट के मुताबिक धमकी मिलने के बाद अदनान रात में फिरोज उर्फ भूरा के पास पहुंचा और पूरी बात बताई।
इसके बाद ही भूरा कथित तौर पर हथियार लेकर असलम के घर की तरफ गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से पुलिस तक पहुंचा।
दूसरी तरफ भूरा ने पूछताछ में विवाद को पैसों के लेनदेन से जुड़ा बताया। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार भूरा का कहना था कि उसकी कुछ रकम असलम पहलवान और सिराज पर बकाया थी और इसी रकम को लेकर विवाद हुआ था।
अब पुलिस को यह पता लगाना है कि किस पक्ष का दावा कितना सही है और हथियार के साथ मौके पर पहुंचने की पूरी परिस्थिति क्या थी।
सलमान गाजी गैंग का नाम क्यों आया?
इस प्रकरण में सलमान गाजी का नाम सीधे घटनास्थल पर मौजूद आरोपी के तौर पर सामने नहीं आया है।
उसका नाम असलम पहलवान के कथित गैंग कनेक्शन की वजह से जुड़ा है। दैनिक जागरण ने असलम पहलवान को सलमान गाजी गिरोह का शूटर और हिस्ट्रीशीटर बताया है।
ऐसे में पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या यह केवल दो पक्षों का निजी आर्थिक विवाद था या इसके पीछे संगठित अपराध से जुड़े लोगों की कोई भूमिका भी थी।
“सलमान गैंग पर ऐक्शन” की बात को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। लेकिन सलमान या पूरे गिरोह के खिलाफ इस ताजा घटना के आधार पर कौन-सी नई कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है, इसकी विस्तृत आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
भूरा के पुराने मामलों का रिकॉर्ड भी चर्चा में
फिरोज उर्फ भूरा पहले भी कई मामलों में पुलिस कार्रवाई का सामना कर चुका है।
साल 2022 में हाजी याकूब कुरैशी के परिवार से जुड़े मीट प्लांट मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी। याकूब कुरैशी, उनकी पत्नी और दोनों बेटों समेत कई लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाया गया था।
पुलिस ने उस समय परिवार की संपत्तियों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई भी की थी।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2022 को खरखौदा के अलीपुर स्थित बंद फैक्ट्री पर कई विभागों की टीम ने कार्रवाई की थी। इसके बाद गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 15 बैंक खातों में करीब 68 लाख रुपये फ्रीज और करीब 50 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
2022 में भी गिरफ्तार हुआ था भूरा
मीट प्लांट प्रकरण में फिरोज उर्फ भूरा लंबे समय तक फरार रहा था।
नवंबर 2022 में पुलिस ने उसे गाजियाबाद के वसुंधरा से गिरफ्तार किया था। उस समय उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
उस मामले में याकूब कुरैशी, उनकी पत्नी, बेटे इमरान और फिरोज समेत सात लोगों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।
यह पुराना रिकॉर्ड अब ताजा मामले के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
पासपोर्ट मामले में भी दर्ज हुआ था मुकदमा
फिरोज उर्फ भूरा के खिलाफ पासपोर्ट से जुड़ा एक पुराना मामला भी दर्ज है।
अगस्त 2024 में उसे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दुबई जाते समय रोका गया था। उस समय उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने की बात सामने आई थी।
बाद की जांच में पासपोर्ट नवीनीकरण के सत्यापन को लेकर कथित गड़बड़ी सामने आई। इस मामले में भूरा और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पासपोर्ट सत्यापन में लापरवाही के आरोप में एक दरोगा और पुलिसकर्मी को निलंबित भी किया गया था।
पहले भी हथियार लहराने का लगा था आरोप
भूरा पर हथियार दिखाने का आरोप पहली बार नहीं लगा है।
साल 2017 में भी मेरठ में उसके खिलाफ पिस्टल लहराने और व्यापारियों को धमकाने के आरोप में मुकदमा दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसके अलावा 2023 में पुलिस द्वारा सील किए गए मकान की सील तोड़ने के आरोप में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। उस समय वह गैंगस्टर मामले में जमानत पर बाहर था।
इन पुराने मामलों में अलग-अलग न्यायिक स्थिति हो सकती है, इसलिए केवल FIR दर्ज होने को दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता।
हिस्ट्रीशीट खुलने से क्या होगा?
उत्तर प्रदेश पुलिस व्यवस्था में किसी व्यक्ति की हिस्ट्रीशीट खोले जाने का मतलब उसे किसी नए अपराध में स्वतः दोषी घोषित करना नहीं है।
आमतौर पर हिस्ट्रीशीट के जरिए पुलिस किसी व्यक्ति के पुराने आपराधिक मामलों, गतिविधियों, संपर्कों और आवाजाही से जुड़ा रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से रखती है और आवश्यकता के अनुसार निगरानी करती है।
भूरा के खिलाफ पुराने मामलों और अब सामने आए ताजा हथियार प्रकरण के कारण उसकी गतिविधियों को लेकर पुलिस की निगरानी बढ़ सकती है।
हालांकि भूरा की हिस्ट्रीशीट खोलने के औपचारिक आदेश की प्रति या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का विस्तृत बयान उपलब्ध होने के बाद ही यह साफ होगा कि किस श्रेणी में और किन मामलों के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है।
याकूब परिवार पर फिर बढ़ा दबाव
ताजा विवाद ने पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी के परिवार को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
याकूब कुरैशी बसपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का जाना-पहचाना नाम रहे हैं। उनके परिवार पर 2022 के मीट प्लांट मामले के बाद गैंगस्टर एक्ट और संपत्ति जब्ती जैसी बड़ी कार्रवाई हुई थी।
अब छोटे बेटे फिरोज उर्फ भूरा की गिरफ्तारी ने परिवार की मुश्किलें फिर बढ़ा दी हैं।
फिलहाल भूरा न्यायिक हिरासत में है। पुलिस उसके फरार साथियों की तलाश और घटना की पूरी कड़ी जोड़ने में लगी है। दूसरी ओर बचाव पक्ष वीडियो और दूसरे साक्ष्यों पर सवाल उठा रहा है।
इस मामले में सबसे अहम सवाल अब यह है कि पुलिस जांच में पैसों के विवाद, असलम पहलवान के कथित गैंग कनेक्शन और हथियार लेकर पहुंचने के घटनाक्रम के बारे में क्या नए तथ्य सामने आते हैं।
अगर जांच में संगठित गिरोह से सीधा संबंध सामने आता है तो मामला और बड़ा हो सकता है। फिलहाल आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।