लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनाव कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है और जनता के बीच जाने से बच रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि जो पार्टी बड़े-बड़े चुनावी दावे करती है और पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की बात करती है, वही उत्तर प्रदेश में समय पर पंचायत चुनाव कराने से पीछे हट रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार पंचायत चुनाव कराने में इतनी देरी क्यों कर रही है।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा को ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के गुस्से का डर सता रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार जानती है कि गांवों में लोगों के बीच जाकर जवाब देना आसान नहीं होगा, इसलिए चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि जनता बदलाव चाह रही है और आने वाले चुनावों में भाजपा को इसका जवाब मिलेगा।
उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, क्योंकि गांव स्तर पर जनता सीधे अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है। अगर समय पर चुनाव नहीं होते हैं तो इसका असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने भाजपा सरकार से मांग की कि बिना किसी देरी के पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार विकास और सुशासन के दावे करती है, लेकिन जब जनता के बीच जाने का समय आता है तो पीछे हट जाती है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में देरी केवल प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।
सपा अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनावी माहौल से बचने के लिए अलग-अलग बहाने तलाश रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब सरकार के कामकाज का हिसाब मांगना चाहती है और यही वजह है कि भाजपा चुनाव कराने से घबरा रही है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पंचायत चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर जनता की आवाज उठाएंगे। अखिलेश यादव ने दावा किया कि ग्रामीण इलाकों में भाजपा के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है और आने वाले चुनावों में इसका असर दिखाई देगा।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफी अहम माने जाते हैं, क्योंकि इनके नतीजे गांवों में राजनीतिक पकड़ का संकेत देते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव सभी राजनीतिक दलों के लिए संगठन मजबूत करने और जनसमर्थन परखने का बड़ा मौका होते हैं।
भाजपा की ओर से सपा के आरोपों पर लगातार जवाब दिए जाते रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया संवैधानिक और प्रशासनिक नियमों के अनुसार होती है और इसमें किसी तरह की राजनीतिक मंशा नहीं होती। वहीं सपा लगातार पंचायत चुनाव में देरी को लेकर सरकार पर सवाल उठा रही है।
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अब सभी दलों की नजर सरकार और चुनाव आयोग के अगले कदम पर है।
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