कानपुर। फर्जी डिग्री मामले में करीब एक महीने से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी अखिलेश शुक्ला को कानपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्नाव निवासी अखिलेश को पुलिस ने उर्सला अस्पताल रोड से उस समय पकड़ा, जब वह अपने वकील से मिलने के लिए कानपुर आया था। पुलिस के मुताबिक आरोपी अदालत में आत्मसमर्पण करने की तैयारी में था। जांच के दौरान उसके पांच बैंक खातों में 50 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आने की जानकारी मिली है, जिसके बाद पुलिस अब उसके वित्तीय नेटवर्क और रकम के स्रोत की जांच में जुटी है।
पुलिस के अनुसार अखिलेश शुक्ला फर्जी डिग्री से जुड़े मामले में वांछित था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। करीब एक महीने तक फरार रहने के बाद पुलिस को उसके कानपुर आने की सूचना मिली।
सूचना के आधार पर पुलिस ने उर्सला अस्पताल रोड के आसपास निगरानी बढ़ाई और अखिलेश को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि वह अपने वकील से मुलाकात करने के लिए शहर पहुंचा था और कोर्ट में सरेंडर करने की तैयारी कर रहा था। हालांकि इससे पहले ही पुलिस ने उसे दबोच लिया।
फरारी के दौरान नेपाल में रहा आरोपी
पुलिस की पूछताछ में अखिलेश की फरारी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है। बताया गया है कि गिरफ्तारी से बचने के दौरान वह भारत से निकलकर नेपाल चला गया था। वहां उसने एक होटल को अपना ठिकाना बनाया और करीब 32 दिनों तक रहा।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नेपाल जाने और वहां रहने के दौरान आरोपी की किन लोगों से बातचीत हुई थी। उसके यात्रा संबंधी रिकॉर्ड और अन्य जानकारियों को भी जांच के दायरे में लिया जा सकता है। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि फरारी के दौरान उसे किसी व्यक्ति ने आर्थिक या अन्य तरह की मदद उपलब्ध कराई थी या नहीं।
नेपाल में करीब एक महीने से ज्यादा समय बिताने के बाद अखिलेश के वापस आने और कानपुर पहुंचने की जानकारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। बताया जा रहा है कि वह कानूनी विकल्पों पर चर्चा करने के लिए वकील से मिलने आया था।
पांच बैंक खातों में 50 करोड़ से अधिक का लेनदेन
मामले की जांच में सबसे महत्वपूर्ण पहलू आरोपी के बैंक खातों में हुए बड़े वित्तीय लेनदेन को माना जा रहा है। पुलिस को अखिलेश के पांच बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनमें कुल 50 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन होने की बात सामने आई है।
हालांकि खातों में इतनी बड़ी रकम का लेनदेन होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। अब जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि रकम कहां से आई, किस उद्देश्य से खातों में भेजी गई और बाद में किन लोगों या संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर की गई।
पुलिस बैंक खातों की स्टेटमेंट और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। यदि किसी तरह के संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।
रकम के स्रोत की होगी जांच
पांच खातों में 50 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की जानकारी सामने आने के बाद फर्जी डिग्री मामले की जांच का दायरा बढ़ सकता है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल किस तरह के वित्तीय लेनदेन के लिए किया गया।
खातों में रकम जमा कराने वाले और रकम प्राप्त करने वाले लोगों की पहचान भी महत्वपूर्ण होगी। लेनदेन का फर्जी डिग्री मामले से कोई संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस आरोपी से पूछताछ कर उसके आर्थिक स्रोत, संपत्तियों और व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध में भी जानकारी जुटा सकती है। जरूरत पड़ने पर वित्तीय दस्तावेजों का विश्लेषण किया जाएगा।
CSJMU में भी कर चुका है नौकरी
अखिलेश शुक्ला का संबंध छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय यानी सीएसजेएमयू से भी सामने आया है। बताया गया है कि वह विश्वविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस व्यवस्था के तहत कई वर्षों तक नौकरी कर चुका है।
जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में अभी भी उसका नाम दर्ज है। इसके बाद अब उसकी नियुक्ति, सेवा अवधि और विश्वविद्यालय में उसकी भूमिका से जुड़े रिकॉर्ड भी चर्चा में आ गए हैं।
पुलिस जांच में यदि जरूरत पड़ती है तो विश्वविद्यालय से उसके सेवा संबंधी दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि उसने वहां कब से कब तक काम किया और उसकी जिम्मेदारियां क्या थीं।
फर्जी डिग्री मामले की जांच में अहम गिरफ्तारी
पुलिस इस गिरफ्तारी को मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। एक महीने से ज्यादा समय से आरोपी की तलाश की जा रही थी। फरार होने और नेपाल में रहने के कारण पुलिस के लिए उसे पकड़ना चुनौती बना हुआ था।
अखिलेश की गिरफ्तारी के बाद उससे फर्जी डिग्री मामले से संबंधित कई बिंदुओं पर पूछताछ की जा सकती है। पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे और इसकी कार्यप्रणाली क्या थी।
यदि मामले में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो जांच का दायरा अन्य शहरों और राज्यों तक भी बढ़ सकता है। फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों से जुड़े मामलों में आमतौर पर दस्तावेज तैयार करने, उन्हें उपलब्ध कराने और उनका इस्तेमाल कराने वाले लोगों की अलग-अलग भूमिकाएं हो सकती हैं।
मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड की भी हो सकती है जांच
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, ईमेल और अन्य डिजिटल जानकारियों के जरिए उसके संपर्कों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
पुलिस विशेष रूप से फरारी से पहले और फरारी के दौरान किए गए संपर्कों की पड़ताल कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि नेपाल जाने और वहां रहने के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था।
बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का आपस में मिलान भी किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति के साथ लगातार बातचीत और वित्तीय लेनदेन दोनों सामने आते हैं तो उसकी भूमिका की भी जांच हो सकती है।
सरेंडर से पहले पुलिस ने दबोचा
पुलिस के मुताबिक अखिलेश अदालत में सरेंडर करने की फिराक में था। इसी सिलसिले में वह अपने वकील से मिलने कानपुर पहुंचा था। पुलिस को उसके आने की सूचना मिली और उर्सला अस्पताल रोड पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
अब आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाएगा और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस जरूरत के मुताबिक पूछताछ के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी।
फिलहाल अखिलेश शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद जांच का फोकस उसके बैंक खातों में हुए 50 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन, कथित फर्जी डिग्री मामले में उसकी भूमिका और उससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान पर है। साथ ही उसके सीएसजेएमयू से संबंध और नेपाल में 32 दिनों की फरारी के दौरान हुई गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।