लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला किया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों को रियायती ब्याज दर पर दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस व्यवस्था के तहत पात्र लघु एवं सीमांत किसानों को उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के माध्यम से केवल **6 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण** उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हुआ है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब खेती की लागत, मशीनरी, सिंचाई और दूसरी कृषि जरूरतों के लिए किसानों की कर्ज पर निर्भरता लगातार चर्चा में है। दो दिन पहले सामने आए आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के किसानों पर केवल किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के जरिए करीब **1.40 लाख करोड़ रुपये का कर्ज** है। पिछले पांच वर्षों में इसमें करीब 16,900 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
6 प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा लोन
योगी सरकार की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक कृषि ऋण को सस्ता करना है।
उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक यानी LDB के जरिए पात्र किसानों को ऋण दिया जाएगा। इस ऋण पर किसान को केवल 6 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर 2025 में इसकी घोषणा करते हुए कहा था कि लघु और सीमांत किसानों को LDB के माध्यम से 6 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज दिया जाएगा और बाकी ब्याज का भार राज्य सरकार उठाएगी।
अब कैबिनेट से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इस व्यवस्था को लागू करने का रास्ता और साफ हो गया है।
पहले 11 से 11.5 प्रतिशत तक था ब्याज
इस फैसले का फायदा समझने के लिए पुरानी ब्याज दर को देखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत सहकारी ग्राम विकास बैंक से मिलने वाले ऋण पर पहले करीब **11 से 11.5 प्रतिशत तक ब्याज** लगने की जानकारी दी गई थी।
नई व्यवस्था में किसान की प्रभावी ब्याज दर 6 प्रतिशत रखने का लक्ष्य है। यानी ब्याज का एक बड़ा हिस्सा सरकार की सहायता से कम होगा।
उदाहरण के लिए यदि कोई पात्र किसान लंबी अवधि के लिए कृषि निवेश हेतु ऋण लेता है तो ब्याज दर में करीब पांच प्रतिशत अंक की कमी उसके कुल भुगतान पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।
हालांकि वास्तविक बचत ऋण की रकम, अवधि, पुनर्भुगतान कार्यक्रम और योजना की अंतिम शर्तों पर निर्भर करेगी।
किन किसानों को मिलेगा फायदा?
इस योजना का फोकस मुख्य रूप से **लघु एवं सीमांत किसानों** पर है।
उत्तर प्रदेश में छोटे जोत वाले किसानों की संख्या काफी ज्यादा है। ऐसे किसानों के सामने खेती के आधुनिकीकरण के लिए एकमुश्त बड़ी रकम जुटाना मुश्किल होता है।
ट्रैक्टर या कृषि मशीन खरीदनी हो, सिंचाई का साधन विकसित करना हो, पशुपालन शुरू करना हो या खेत से जुड़ा स्थायी ढांचा बनाना हो—इन सभी कामों में लंबे समय के लिए पूंजी की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसी जरूरतों के लिए दीर्घकालिक ऋण महत्वपूर्ण होता है।
₹6 लाख तक कर्ज की चर्चा
15 सितंबर की कैबिनेट बैठक से पहले सामने आई रिपोर्टों में प्रस्ताव के तहत किसानों को **₹6 लाख तक का दीर्घकालिक ऋण 6 प्रतिशत ब्याज दर पर** देने की बात कही गई थी।
हालांकि लाभार्थी की वास्तविक ऋण सीमा उसकी पात्रता, उद्देश्य, बैंक के नियम और योजना के विस्तृत शासनादेश के अनुसार तय होगी।
इसलिए यह नहीं माना जाना चाहिए कि हर किसान को आवेदन करते ही ₹6 लाख का ऋण मिल जाएगा।
किसान की पात्रता, भूमि और परियोजना समेत बैंकिंग मानकों की जांच की जा सकती है।
सरकार भरेगी ब्याज का अंतर
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ब्याज में मिलने वाली राहत है।
सहकारी ग्राम विकास बैंक की सामान्य ऋण दर और किसान से वसूली जाने वाली रियायती 6 प्रतिशत दर के बीच का अंतर राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने की व्यवस्था है।
दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए स्पष्ट किया था कि किसान को 6 प्रतिशत ब्याज पर ऋण मिलेगा और शेष राशि में सरकार योगदान करेगी।
इसका उद्देश्य बैंक को मिलने वाले ब्याज को पूरी तरह समाप्त करना नहीं, बल्कि किसान पर पड़ने वाले ब्याज के बोझ को कम करना है।
खेती में कहां काम आ सकता है पैसा?
दीर्घकालिक कृषि ऋण सामान्य फसल खर्च वाले छोटे कर्ज से अलग होता है।
किसानों को खेत में ऐसी संपत्ति तैयार करने के लिए ज्यादा रकम की जरूरत होती है जिसका फायदा कई वर्षों तक मिलता है।
इसमें कृषि यंत्र, सिंचाई व्यवस्था, बागवानी, डेयरी, पशुपालन और कृषि से जुड़े दूसरे निवेश शामिल हो सकते हैं।
योजना के तहत वास्तव में किन गतिविधियों के लिए ऋण मिलेगा, इसका अंतिम दायरा संबंधित बैंक और सरकार के विस्तृत दिशा-निर्देशों से तय होगा।
इसलिए किसी खास गतिविधि को अभी स्वतः पात्र मानना उचित नहीं होगा।
KCC से अलग समझें यह योजना
किसानों को मिलने वाले इस ऋण को सामान्य किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC कर्ज से अलग समझना जरूरी है।
KCC मुख्य रूप से किसानों की अल्पकालिक फसल और कार्यशील पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होता है।
वहीं उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक से जुड़ी यह व्यवस्था दीर्घकालिक कृषि ऋण पर केंद्रित है।
यानी दोनों योजनाओं का उद्देश्य और ऋण अवधि अलग हो सकती है।
इसी कारण केवल 6 प्रतिशत ब्याज वाली खबर देखकर यह समझना गलत होगा कि उत्तर प्रदेश में अब हर प्रकार का किसान ऋण 6 प्रतिशत पर मिलेगा।
3 से 15 साल तक की अवधि
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना से जुड़े पूर्व विवरण के मुताबिक सहकारी ग्राम विकास बैंक के जरिए मिलने वाले ऋण की अवधि जरूरत के अनुसार **3 से 15 वर्ष तक** हो सकती है।
लंबी अवधि का फायदा यह है कि किसान को पूरी रकम थोड़े समय में वापस करने का दबाव नहीं पड़ता।
अगर ऋण का इस्तेमाल ऐसी कृषि संपत्ति तैयार करने में किया जाता है जिससे कई वर्षों तक आय होती है तो लंबी पुनर्भुगतान अवधि किसान के नकदी प्रवाह को संभालने में मदद कर सकती है।
हालांकि अंतिम अवधि ऋण के प्रकार और बैंक की स्वीकृति पर निर्भर करेगी।
किसानों के लिए क्यों अहम है फैसला?
कृषि में पूंजी की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
बीज, खाद और डीजल जैसे नियमित खर्चों के अलावा आधुनिक खेती के लिए मशीनरी और सिंचाई पर भी निवेश करना पड़ता है।
छोटे किसान के पास अक्सर इतनी बचत नहीं होती कि वह एक साथ बड़ी रकम खर्च कर सके।
ऐसी स्थिति में बैंक ऋण महत्वपूर्ण हो जाता है।
लेकिन अगर ब्याज दर ज्यादा हो तो ऋण की किस्त किसान की आय का बड़ा हिस्सा खा सकती है।
6 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर इस बोझ को कम करने की कोशिश है।
साहूकारों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य
ग्रामीण क्षेत्रों में औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था तक आसान पहुंच नहीं होने पर किसान कई बार निजी स्रोतों से कर्ज लेते हैं।
निजी उधार पर ब्याज दर बैंकिंग व्यवस्था के मुकाबले काफी अधिक हो सकती है।
सरकारी सहायता वाली सस्ती ऋण व्यवस्था किसानों को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम की तरफ लाने में मदद कर सकती है।
इससे ऋण की शर्तें ज्यादा स्पष्ट रहती हैं और किसान को निर्धारित पुनर्भुगतान व्यवस्था मिलती है।
हालांकि योजना का वास्तविक असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि आवेदन और ऋण मंजूरी की प्रक्रिया किसानों के लिए कितनी आसान बनाई जाती है।
दिसंबर में योगी ने किया था ऐलान
इस फैसले की नींव दिसंबर 2025 में ही रख दी गई थी।
21 दिसंबर को लखनऊ में यूपी को-ऑपरेटिव एक्सपो और युवा सहकार सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लघु एवं सीमांत किसानों को 6 प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की ब्याज दर कम करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।
अब सितंबर 2026 में कैबिनेट की मंजूरी के बाद घोषणा को नीतिगत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ गया है।
चुनाव से पहले फैसले के राजनीतिक मायने
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
ऐसे में किसानों के लिए लिया गया यह फैसला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े कृषि राज्यों में शामिल है और ग्रामीण मतदाता राज्य की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसान महत्वपूर्ण हैं तो पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश में धान, गेहूं और दूसरी फसलों पर निर्भर किसानों की बड़ी आबादी है।
ऐसे में खेती की लागत और किसान कर्ज जैसे मुद्दों का चुनावी राजनीति पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
सिर्फ किसान नहीं कई वर्गों को राहत
15 सितंबर को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में कुल **23 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी** मिलने की रिपोर्ट है।
किसानों के सस्ते ऋण के अलावा पीआरडी जवानों के दैनिक ड्यूटी भत्ते में बढ़ोतरी, उनके लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा, कोटेदारों के मार्जिन और नई खिलौना प्रोत्साहन नीति समेत कई प्रस्तावों पर फैसला लिया गया।
इससे संकेत मिलता है कि सरकार चुनावी वर्ष की ओर बढ़ते हुए ग्रामीण, कर्मचारी और कारोबारी समेत अलग-अलग वर्गों से जुड़े फैसलों पर जोर दे रही है।
किसानों के लिए कितना बड़ा फायदा?
मान लीजिए किसी किसान को सामान्य रूप से 11.5 प्रतिशत ब्याज देना पड़ता और अब वही पात्र ऋण 6 प्रतिशत प्रभावी दर पर मिलता है।
ऐसे में ब्याज दर में 5.5 प्रतिशत अंक का अंतर होगा।
लंबी अवधि के बड़े ऋण पर यह अंतर कुल ब्याज भुगतान में महत्वपूर्ण बचत करा सकता है।
लेकिन यहां किसी निश्चित बचत की रकम बताना उचित नहीं होगा क्योंकि ऋण घटती शेष राशि पर है या किसी दूसरी गणना पद्धति पर, अवधि कितनी है और किस्तें कैसी हैं—इन सभी से वास्तविक ब्याज बदलता है।
आवेदन की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
कैबिनेट से प्रस्ताव मंजूर होने के बाद किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल होगा कि इसका लाभ कब से और कैसे मिलेगा।
विस्तृत शासनादेश में पात्रता, अधिकतम ऋण सीमा, आवश्यक दस्तावेज, ब्याज सब्सिडी की प्रक्रिया और आवेदन का तरीका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
ऋण उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
किसानों को आवेदन से पहले बैंक की आधिकारिक शर्तें और संबंधित सरकारी आदेश देखना चाहिए।
लोन माफी नहीं है यह योजना
इस फैसले को कर्जमाफी समझना भी गलत होगा।
सरकार किसान का पूरा ऋण माफ नहीं कर रही है।
यह **रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की योजना** है।
किसान को मूलधन और उसके हिस्से का ब्याज निर्धारित समय के अनुसार चुकाना होगा।
सरकार की भूमिका सामान्य ब्याज दर और किसान के लिए निर्धारित रियायती ब्याज दर के बीच अंतर का भार उठाने की है।
यह अंतर समझना जरूरी है क्योंकि सोशल मीडिया पर किसान ऋण से जुड़े फैसलों को कई बार कर्जमाफी के रूप में पेश कर दिया जाता है।
कैबिनेट की मंजूरी से आगे बढ़ा रास्ता
योगी सरकार का यह फैसला उन लघु और सीमांत किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है जिन्हें खेती में दीर्घकालिक निवेश के लिए कर्ज की जरूरत पड़ती है।
दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री ने 6 प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने की घोषणा की थी और अब कैबिनेट की मंजूरी से इसे लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
अब किसानों की नजर विस्तृत शासनादेश और क्रियान्वयन पर रहेगी।
योजना का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब पात्र किसानों को आसानी से ऋण मिले और ब्याज सहायता की प्रक्रिया सरल रहे।
फिलहाल कैबिनेट की मंजूरी ने इतना साफ कर दिया है कि योगी सरकार ने लघु और सीमांत किसानों के दीर्घकालिक कृषि ऋण पर ब्याज का बोझ कम करने की अपनी घोषणा को आगे बढ़ा दिया है। चुनाव से पहले आया यह फैसला आर्थिक राहत के साथ उत्तर प्रदेश की ग्रामीण राजनीति में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।