यमुनापार। लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। यमुनापार के कोरांव और मेजा क्षेत्र में बारिश के कारण 77 सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनमें कोरांव क्षेत्र की 50 और मेजा क्षेत्र की 27 सड़कें शामिल हैं।

बारिश के पानी के तेज बहाव से कई जगह सड़कें बह गई हैं, जबकि कई मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इससे ग्रामीणों को गांव से मुख्य मार्ग तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कई संपर्क मार्गों की हालत खराब

ग्रामीण क्षेत्रों में बनी कई संपर्क सड़कों की स्थिति बारिश के बाद खराब हो गई है। इन मार्गों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं।

कई गांवों को मुख्य सड़क और बाजारों से जोड़ने वाले रास्ते क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।

सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों और रोजाना काम के लिए बाहर जाने वाले लोगों को उठानी पड़ रही है।

कोरांव क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान

बारिश से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र कोरांव बताया जा रहा है। यहां कुल 50 सड़कें खराब हुई हैं।

इनमें कई ऐसी सड़कें भी शामिल हैं, जिनका निर्माण पिछले एक से दो वर्षों के भीतर करोड़ों रुपये खर्च कर कराया गया था।

ग्रामीणों का कहना है कि नई बनी सड़कों के खराब होने से निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मेजा में भी 27 सड़कें प्रभावित

मेजा क्षेत्र में भी बारिश का असर देखने को मिला है। यहां 27 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं।

कई स्थानों पर सड़क की सतह टूट गई है और जलभराव के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित न हों।

करोड़ों की लागत से बनी सड़कें हुईं खराब

ग्रामीणों के अनुसार, जिन सड़कों को बनाने में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, वे कुछ ही समय में खराब हो गई हैं।

लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क निर्माण की गुणवत्ता की पोल खुल जाती है।

उन्होंने मांग की है कि क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के साथ-साथ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की भी जांच कराई जाए।

आवागमन में बढ़ी परेशानी

सड़कें खराब होने से ग्रामीणों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कई जगहों पर वाहन फिसलने और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए खराब सड़कें ज्यादा परेशानी का कारण बन रही हैं।

कई ग्रामीणों का कहना है कि जरूरी कामों के लिए बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।

प्रशासन ने शुरू कराया सर्वे

सड़कों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने क्षतिग्रस्त मार्गों का सर्वे शुरू कराया है।

अधिकारियों की ओर से खराब सड़कों की सूची तैयार की जा रही है, ताकि प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य कराया जा सके।

बारिश कम होने के बाद बड़े स्तर पर सड़क सुधार कार्य शुरू किए जाने की संभावना है।

ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के बाद सड़कों की यही स्थिति हो जाती है।

बार-बार मरम्मत कराने के बजाय जल निकासी और मजबूत निर्माण व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है।

लोगों ने मांग की है कि भविष्य में सड़कें ऐसी तकनीक से बनाई जाएं, जो बारिश और जलभराव को सहन कर सकें।

बारिश बनी ग्रामीण विकास के लिए चुनौती

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं। लेकिन बारिश के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होने से स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाओं पर भी असर पड़ता है।

यमुनापार के कोरांव और मेजा क्षेत्रों में 77 सड़कों के खराब होने से एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में मजबूत सड़क व्यवस्था की जरूरत सामने आई है।

फिलहाल ग्रामीण प्रशासन से जल्द राहत और मरम्मत कार्य शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि उन्हें आवागमन में राहत मिल सके।

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