तमिलनाडु :  राजनीति में अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम एक बार फिर विवाद के केंद्र में आ गया है। तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) प्रमुख और अभिनेता से नेता बने थलपति विजय पर निशाना साधते हुए एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता आरबी उदयकुमार ने अभिनेत्री तृषा का नाम लेकर विवादित टिप्पणी की है। उदयकुमार ने तंज कसते हुए सवाल किया कि तृषा को तमिलनाडु का उपमुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु इस बात का इंतजार कर रहा है। यह टिप्पणी एआईएडीएमके के एक कार्यक्रम के दौरान की गई, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
उदयकुमार की टिप्पणी के बाद अभिनेत्री के प्रशंसकों में नाराजगी देखने को मिली। तृषा फैन्स एसोसिएशन की ओर से मदुरै में पोस्टर लगाकर एआईएडीएमके नेता के बयान की आलोचना की गई। प्रशंसकों ने इसे अभिनेत्री के प्रति अपमानजनक टिप्पणी बताते हुए राजनीतिक बहस में निजी और फिल्मी हस्तियों को घसीटने पर सवाल उठाए। हालांकि, तृषा कृष्णन या थलपति विजय की ओर से इस मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आरबी उदयकुमार जिस मुद्दे पर बोल रहे थे, उसका संबंध टीवीके में हालिया नियुक्तियों से था। उन्होंने आरोप लगाया कि विजय की पार्टी और उससे जुड़े राजनीतिक ढांचे में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। उन्होंने कई नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि क्या पार्टी में फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
उदयकुमार ने अपने भाषण में कुछ ऐसे लोगों का जिक्र किया, जिन्होंने विजय की फिल्मों के निर्माण या तकनीकी पक्ष में काम किया है और बाद में उन्हें विभिन्न जिम्मेदारियां मिलने की बात सामने आई है। इनमें मंदिर ट्रस्ट, तमिलनाडु सरकार के प्रतिनिधि पद, मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़ी जिम्मेदारियां, राज्य फिल्म प्रशिक्षण संस्थान और सरकारी सलाहकार जैसे पदों का उल्लेख किया गया। इसी क्रम में उन्होंने तृषा का नाम लेते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की और पूछा कि उन्हें उपमुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा।
उनके बयान ने इसलिए भी विवाद को जन्म दिया क्योंकि पिछले कुछ समय से तमिलनाडु की राजनीति में विजय और तृषा के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं होती रही हैं। दोनों कलाकारों ने फिल्मों में साथ काम किया है और उनके व्यक्तिगत संबंधों को लेकर समय-समय पर अफवाहें भी सामने आती रही हैं। हालांकि, ऐसी चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद राजनीतिक बयानबाजी में अभिनेत्री का नाम इस्तेमाल किए जाने से विवाद बढ़ता रहा है।
इससे पहले डीएमके नेता और तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन भी तृषा कृष्णन का नाम लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर विवादों में घिर चुके हैं। कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक विरोध कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन विजय पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान भीड़ की ओर से तृषा का नाम पुकारे जाने के बाद उन्होंने कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसकी व्यापक आलोचना हुई।
उस घटना के बाद टीवीके की ओर से उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराने की बात सामने आई थी। पुलिस ने उनसे पूछताछ भी की थी। इस पूरे विवाद के बाद राजनीतिक मंचों पर महिला कलाकारों के नाम लेकर निजी टिप्पणी किए जाने को लेकर बहस तेज हो गई थी। अब आरबी उदयकुमार की टिप्पणी ने इस मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
तृषा के प्रशंसकों का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों के बीच व्यक्तिगत जीवन या अभिनेत्री के नाम को निशाना बनाना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने उदयकुमार के बयान की आलोचना की है। प्रशंसकों की ओर से लगाए गए पोस्टरों में नेता के बयान को लेकर विरोध जताया गया है।
विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि तृषा और विजय दोनों ने अब तक इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ऐसे में उनके निजी संबंधों को लेकर चल रही चर्चाओं को राजनीतिक बयानबाजी का आधार बनाया जाना भी सवालों के घेरे में है।
तमिलनाडु में अगले राजनीतिक दौर की तैयारियों के बीच अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके लगातार राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा रही है। ऐसे में एआईएडीएमके और डीएमके जैसे पुराने राजनीतिक दलों की ओर से टीवीके पर हमले भी तेज हो रहे हैं। इसी राजनीतिक टकराव के बीच फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की नियुक्तियां और विजय के पुराने फिल्मी सहयोगियों की भूमिका भी चर्चा का विषय बन रही है।
फिलहाल आरबी उदयकुमार की टिप्पणी के बाद तृषा के प्रशंसकों में नाराजगी है और राजनीतिक बयानबाजी पर बहस जारी है। अभिनेत्री और विजय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आने के कारण विवाद का अगला रुख राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों की प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करेगा। यह घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा और राजनीति के गहरे संबंधों के बीच फिल्मी हस्तियों के नाम किस तरह राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं।
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