रामेश्वरम। रामेश्वरम ऑल मैकेनाइज्ड बोट फिशरमेन एसोसिएशन ने तमिलनाडु सरकार से श्रीलंकाई अधिकारियों द्वारा जब्त की गई मछली पकड़ने वाली नावों के मालिकों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि नावें जब्त होने के कारण कई मछुआरा परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। समुद्र में जाकर मछली पकड़ना ही इन परिवारों की आय का मुख्य जरिया है और नाव नहीं होने से उनकी कमाई प्रभावित हुई है।एसोसिएशन के अध्यक्ष वी.पी. जेसुराज ने शुक्रवार को कहा कि पाक जलडमरूमध्य क्षेत्र में मछली पकड़ने के दौरान तमिलनाडु के मछुआरों की कई नावें श्रीलंकाई अधिकारियों द्वारा जब्त की गई थीं। उनका कहना है कि इनमें से कई नावें वापस नहीं मिल सकी हैं। इसके कारण नाव मालिकों के साथ-साथ उन पर काम करने वाले मछुआरों और उनके परिवारों को भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जेसुराज के मुताबिक मछुआरा संगठनों ने इससे पहले भी राज्य सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया था। उनकी प्रमुख मांगों में श्रीलंका की हिरासत में मौजूद मछुआरों और मशीनीकृत नावों की रिहाई, जब्त या क्षतिग्रस्त नावों के लिए मुआवजा और पाक खाड़ी में लंबे समय से चले आ रहे मछली पकड़ने के विवाद का स्थायी समाधान शामिल है।अगस्त में मछुआरा संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की थी। रिपोर्टों के मुताबिक 31 अगस्त से प्रस्तावित हड़ताल और इसके बाद भूख हड़ताल की योजना बनाई गई थी। हालांकि तमिलनाडु के मत्स्य मंत्री से मिले आश्वासन के बाद मछुआरों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया था। मंत्री ने उनकी समस्याओं पर सरकार की ओर से हस्तक्षेप और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था।
मछुआरों की चिंता केवल नावों तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि एक मशीनीकृत नाव से कई परिवारों की आजीविका जुड़ी रहती है। नाव का मालिक ही नहीं बल्कि चालक, मछुआरे और इससे जुड़े अन्य श्रमिक भी समुद्र में होने वाली मछली पकड़ने की गतिविधियों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में नाव जब्त होने या लंबे समय तक श्रीलंका में पड़े रहने से पूरा आर्थिक चक्र प्रभावित होता है। मछुआरों ने पहले भी कहा था कि उनकी दैनिक जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई तक का खर्च इसी कमाई से चलता है।एसोसिएशन का कहना है कि जिन मछुआरों की नावें वापस मिलने की स्थिति में नहीं हैं, उनके लिए पर्याप्त मुआवजे की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे प्रभावित परिवारों को दोबारा अपनी आजीविका शुरू करने में मदद मिल सकेगी। जेसुराज ने इससे पहले भी दावा किया था कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में जब्त नावों के लिए आठ लाख रुपये तक की सहायता दी जाती थी और मौजूदा सरकार से भी प्रभावित लोगों को राहत देने की मांग की गई है।
अगस्त में हुए आंदोलन के दौरान मछुआरों ने केंद्र और राज्य सरकार से भारत तथा श्रीलंका के बीच मछुआरों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत फिर शुरू कराने की मांग भी की थी। उनका कहना था कि दोनों देशों के मछुआरों और अधिकारियों के बीच संवाद से समुद्री सीमा और मछली पकड़ने से जुड़े विवादों का दीर्घकालिक समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है।मछुआरा संगठनों के अनुसार श्रीलंकाई नौसेना द्वारा मछुआरों की गिरफ्तारी और नावों की जब्ती की घटनाओं ने रामेश्वरम तथा आसपास के तटीय इलाकों में चिंता बढ़ाई है। जुलाई और अगस्त में भी गिरफ्तारी और नाव जब्त किए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। अगस्त में नौ तमिलनाडु मछुआरों को कथित तौर पर श्रीलंकाई जलक्षेत्र में मछली पकड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उनकी नाव भी जब्त की गई थी।
इस मुद्दे को लेकर जुलाई में भी रामेश्वरम के मशीनीकृत नाव मछुआरों ने विरोध दर्ज कराया था। उस समय लगातार गिरफ्तारियों के विरोध में तीन दिन की हड़ताल की घोषणा की गई थी। मछुआरा नेताओं ने राज्य सरकार से पाक खाड़ी में काम करने वाले तमिलनाडु के मछुआरों की आजीविका और अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की थी।अब रामेश्वरम ऑल मैकेनाइज्ड बोट फिशरमेन एसोसिएशन ने एक बार फिर मुआवजे की मांग को प्रमुखता से उठाया है। संगठन चाहता है कि जिन परिवारों की नावें श्रीलंका में जब्त होने के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हुई है, उन्हें बिना देरी आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही मछुआरों और उनकी नावों की रिहाई तथा भारत-श्रीलंका के बीच इस पुराने समुद्री विवाद के स्थायी समाधान के लिए कूटनीतिक स्तर पर कदम उठाए जाएं।