तमिलनाडु में फिर तेज होगा NEET विरोध आंदोलन

Update: 2026-07-26 14:08 GMT

तमिलनाडु : NEET परीक्षा को लेकर एक बार फिर विरोध की आवाज तेज होने जा रही है। राज्य में जल्द ही एक नया एंटी-NEET आंदोलन शुरू होने की तैयारी है। इस आंदोलन का नेतृत्व उस छात्र के भाई द्वारा किया जाएगा, जिसने कथित NEET पेपर लीक मामले और परीक्षा व्यवस्था से निराश होकर अपनी जान गंवा दी थी। इस घटनाक्रम ने राज्य में एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है।

तमिलनाडु में लंबे समय से NEET परीक्षा का विरोध होता रहा है। राज्य की कई राजनीतिक पार्टियां यह आरोप लगाती रही हैं कि राष्ट्रीय स्तर की यह परीक्षा ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए बाधा बनती है। उनका कहना है कि राज्य बोर्ड से पढ़ने वाले छात्रों और निजी कोचिंग लेने में सक्षम छात्रों के बीच असमानता पैदा होती है।

नए आंदोलन की घोषणा ऐसे समय में हो रही है, जब देशभर में NEET परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हाल के वर्षों में परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ाई है। तमिलनाडु में इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं।

आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र के भाई ने NEET व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है ताकि किसी भी छात्र को मानसिक दबाव और अन्याय का सामना न करना पड़े। वह छात्रों के अधिकारों और निष्पक्ष शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर लोगों को एकजुट करने की कोशिश करेंगे।

तमिलनाडु की सत्तारूढ़ सरकार भी पहले से NEET के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। राज्य सरकार का कहना है कि मेडिकल प्रवेश के लिए राज्य स्तर की व्यवस्था अधिक उपयुक्त थी, क्योंकि इससे ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के छात्रों को बेहतर अवसर मिलते थे। सरकार कई बार केंद्र से NEET को हटाने या तमिलनाडु को इससे छूट देने की मांग कर चुकी है।

राज्य की राजनीति में NEET एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। सत्तारूढ़ दल के अलावा अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक संगठन भी समय-समय पर इस परीक्षा का विरोध करते रहे हैं। उनका आरोप है कि NEET जैसी परीक्षा सामाजिक और आर्थिक असमानता को बढ़ावा देती है। वहीं केंद्र सरकार और NEET समर्थक पक्ष का कहना है कि एक समान परीक्षा से मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता आती है और देशभर में समान अवसर मिलते हैं।

नए आंदोलन के ऐलान के बाद तमिलनाडु में NEET विरोधी अभियान को फिर से मजबूती मिलने की संभावना है। छात्र संगठन, राजनीतिक दल और सामाजिक कार्यकर्ता इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तैयार कर सकते हैं। आंदोलन के जरिए परीक्षा प्रणाली में बदलाव, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कदम उठाने की मांग की जा सकती है।

NEET को लेकर चल रही बहस अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा नीति, छात्रों के अधिकार और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। आने वाले दिनों में तमिलनाडु में शुरू होने वाला यह नया आंदोलन किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

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