चेन्नई: मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सोमवार को 'थाइमामन थंगा मोथिरम थिट्टम' (मामा की ओर से सोने की अंगूठी देने की योजना) लॉन्च करने वाले हैं। सरकार ने उन ज़्यादातर अस्पतालों में हथियारबंद रिज़र्व पुलिसकर्मी तैनात किए हैं जहाँ लॉकर में सोने की अंगूठियाँ रखी गई हैं। ऐसे में डॉक्टरों ने लंबे समय तक इन अंगूठियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
डॉक्टरों का कहना है कि अंगूठियों को सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी आखिरकार डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर ही आएगी, क्योंकि इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले हथियारबंद रिज़र्व पुलिसकर्मी लंबे समय तक अस्पतालों की सुरक्षा नहीं कर पाएँगे। सर्विस डॉक्टर्स एंड पोस्ट ग्रेजुएट्स एसोसिएशन (SDPGA) के जनरल सेक्रेटरी डॉ. ए. रामलिंगम ने कहा कि अगर मामला ज़रूरी दवाओं या मेडिकल उपकरणों का हो, तो डीन उसे संभाल सकते हैं। उन्होंने कहा, "लेकिन, हमारे (अस्पतालों के) पास सोने की अंगूठियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संसाधन नहीं हैं। अगर कल कोई समस्या आती है, तो डीन और दूसरे कर्मचारियों को बेवजह पूछताछ और कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इससे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े काम प्रभावित होंगे।
डॉक्टरों ने यह भी दोहराया कि सोने की अंगूठियाँ बैंकों (जिनके पास इसके लिए संसाधन हैं) या समाज कल्याण या राजस्व विभाग के ज़रिए बांटी जानी चाहिए। उन्होंने योजना के मकसद पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अगर इस योजना का मकसद ज़्यादा गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों की ओर आकर्षित करना है, तो सरकार को डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाने और बुनियादी ढाँचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को बेहतर बनाने पर खर्च करना चाहिए।