मदुरै। तमिलनाडु के मदुरै जिले के थिरुपरनकुंद्रम पंचायत यूनियन के अंतर्गत आने वाले कई गांवों के किसान पिछले 25 वर्षों से अपनी एक महत्वपूर्ण मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। किसानों की मुख्य मांग यह है कि उन्हें केवल मानसून की बारिश पर निर्भर रहने के बजाय वैगई नदी का पानी भी सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि यदि वैगई नदी का पानी उनके खेतों तक पहुंचाया जाए तो क्षेत्र की कृषि उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
थिरुपरनकुंद्रम पंचायत यूनियन के अंतर्गत थेनपालनजी, वडापालनजी, सक्किलिपट्टी, वेदारपुलियानकुलम, थानक्कनकुलम और थोप्पुर जैसे गांव आते हैं। इन गांवों में लगभग 1,500 एकड़ कृषि भूमि पर धान, केला, चमेली, मिर्च, भिंडी, प्याज़ और बैंगन जैसी प्रमुख फसलों की खेती की जाती है। यह क्षेत्र लंबे समय से कृषि पर आधारित रहा है, लेकिन पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं के अभाव में किसानों को हर वर्ष कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
किसानों का कहना है कि वर्तमान में उनकी खेती लगभग पूरी तरह मानसून की बारिश पर निर्भर है। यदि समय पर और पर्याप्त वर्षा नहीं होती तो खेतों में बोई गई फसलें सूखने लगती हैं और उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होता है। कई बार किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, जिसके कारण वे कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं।
स्थानीय किसान बताते हैं कि वैगई नदी उनके क्षेत्र से अधिक दूर नहीं है और यदि सरकार उचित योजना बनाकर नहरों या पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराए तो हजारों किसानों को सीधा लाभ मिल सकता है। उनका कहना है कि यह परियोजना केवल सिंचाई की समस्या का समाधान नहीं करेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।
किसानों के अनुसार पिछले ढाई दशकों में उन्होंने अपनी मांग को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन किए, ज्ञापन सौंपे और जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की। हर बार उन्हें आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया। उनका आरोप है कि सरकारें बदलती रहीं, लेकिन उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।
क्षेत्र के किसान संगठनों का कहना है कि वैगई नदी का पानी उपलब्ध होने पर वर्ष भर खेती संभव हो सकेगी। वर्तमान में कई किसान पानी की कमी के कारण एक ही मौसम में खेती करने को मजबूर हैं। पर्याप्त सिंचाई मिलने पर वे दूसरी और तीसरी फसल भी उगा सकेंगे, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही चमेली, केला और सब्जियों जैसी नकदी फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा।
किसानों का यह भी कहना है कि पानी की कमी के कारण युवा पीढ़ी खेती से दूर होती जा रही है। रोजगार और बेहतर आय की तलाश में बड़ी संख्या में युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। यदि सिंचाई की समुचित व्यवस्था हो जाए तो कृषि फिर से लाभकारी व्यवसाय बन सकती है और गांवों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि जल प्रबंधन की बेहतर योजना बनाकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि वर्षा जल संचयन, नहरों के आधुनिकीकरण और नदी के जल के प्रभावी उपयोग जैसी योजनाओं को लागू किया जाए तो क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि उनकी लंबे समय से लंबित मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए और वैगई नदी से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की ठोस योजना जल्द लागू की जाए। उनका कहना है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में कृषि संकट और गहरा सकता है।
फिलहाल थिरुपरनकुंद्रम क्षेत्र के किसान एक बार फिर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वर्षों से चल रहा उनका संघर्ष किसी सकारात्मक परिणाम तक पहुंचेगा। उनका विश्वास है कि यदि सरकार समय रहते आवश्यक कदम उठाती है तो न केवल 1,500 एकड़ कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, बल्कि हजारों किसान परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित हो सकेगा। पिछले 25 वर्षों से जारी यह आंदोलन अब केवल पानी की मांग नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका, कृषि सुरक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।