Odisha ओडिशा: ओडिशा में इस वर्ष मॉनसून के समय से पहले पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन राजधानी भुवनेश्वर में खुले नालों की स्थिति को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। बारिश के मौसम में हर साल खुले नालों के कारण होने वाले हादसे एक गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान भी चली जाती है। इस बार भी मॉनसून से पहले सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भुवनेश्वर में खुले नालों की वजह से बाढ़ और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। खासकर भारी बारिश के दौरान सड़क किनारे बने खुले नाले खतरनाक साबित होते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से लंबे समय से समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे नागरिकों में असंतोष देखा जा रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भुवनेश्वर नगर निगम (BMC) के अंतर्गत लगभग 1,400 किलोमीटर लंबा नाला नेटवर्क मौजूद है। इसके अलावा वर्क्स डिपार्टमेंट के तहत 360 किलोमीटर, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (IDCO) के तहत 65 किलोमीटर और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के तहत 34.5 किलोमीटर नालों का प्रबंधन किया जाता है। शहर में लगभग 77 किलोमीटर लंबाई वाले 11 प्रमुख ड्रेनेज चैनल भी मौजूद हैं, जो बारिश के पानी की निकासी के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इतने बड़े ड्रेनेज नेटवर्क के बावजूद खुले नालों की समस्या आज भी गंभीर बनी हुई है। कई जगहों पर नालों पर ढक्कन नहीं लगे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के दौरान पानी भरने से हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं, और कई बार लोग अनजाने में इन नालों में गिरकर घायल हो जाते हैं या उनकी जान चली जाती है।
पिछले कई वर्षों से ओडिशा विधानसभा में शहरी जलभराव और खुले नालों का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। सरकार की ओर से कई बार यह आश्वासन दिया गया है कि नालों पर स्लैब लगाए जाएंगे और जहां जरूरी होगा वहां लोहे के बैरिकेड्स लगाए जाएंगे, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, इन घोषणाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल मॉनसून से पहले आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और कमजोर रखरखाव प्रणाली के कारण ड्रेनेज व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले मॉनसून में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कुल मिलाकर, भुवनेश्वर में खुले नालों की समस्या न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि शहरी सुरक्षा और बाढ़ प्रबंधन को लेकर अभी भी बड़े सुधारों की जरूरत है।