नीलगिरि: मद्रास उच्च न्यायालय ने नीलगिरि जिला प्रशासन को मुदुमलाई टाइगर रिजर्व (MTR) के सेगुर पठार हाथी गलियारे (एलीफेंट कॉरिडोर) में स्थित पांच और रिसॉर्ट्स को गिराने का निर्देश दिया है। इन रिसॉर्ट्स के मालिकों ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल नहीं किया था।

न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार और न्यायमूर्ति डी. लिंगेश्वरन की खंडपीठ ने अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में यह निर्देश जारी किया। यह निर्देश नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व (NBR) में हाथी गलियारे के संरक्षण की मांग करने वाली एक रिट याचिका (WP संख्या 27356/2019) की सुनवाई के दौरान दिया गया।

जिला प्रशासन द्वारा सौंपी गई एक स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, हाथी गलियारे के भीतर सील किए गए 38 रिसॉर्ट्स में से चार को पूरी तरह से और चार अन्य को आंशिक रूप से गिरा दिया गया है।

जहां 25 रिसॉर्ट्स के मालिकों ने अदालत में हलफनामे दाखिल किए हैं, वहीं पांच मालिक ऐसा करने में विफल रहे हैं।

इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए, पीठ ने अधिकारियों को कानून के अनुसार उन पांच रिसॉर्ट्स को गिराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।

जिन रिसॉर्ट्स के मालिकों ने हलफनामे दाखिल किए हैं, उनके संबंध में राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन परिसरों का निरीक्षण करें और पता लगाएं कि क्या इन इमारतों का अभी भी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा है।

पीठ ने अधिकारियों को 18 दिसंबर, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में इन पहलुओं पर एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने सरकारी जमीनों को 'आरक्षित वन' (रिजर्व फॉरेस्ट) के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने के जिला प्रशासन के प्रयासों पर भी ध्यान दिया। पहले से वन श्रेणी में शामिल 35.44 एकड़ भूमि के अलावा, 424.45 एकड़ अतिरिक्त सरकारी भूमि को वन भूमि के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया गया है। राजस्व रिकॉर्ड में इन जमीनों के म्यूटेशन (नामांतरण) की प्रक्रिया चल रही है।

 

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