Mettur डैम से 12 जून को पानी छोड़े जाने पर किसानों में उम्मीद, मानसून पर टिकी निगाहें
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के प्रमुख जल स्रोत मेट्टूर डैम को बने 91 साल पूरे हो चुके हैं और अब इसके 92वें वर्ष में डेल्टा सिंचाई के लिए 12 जून को पानी छोड़े जाने को लेकर किसानों के बीच चर्चा तेज हो गई है। हर साल की तरह इस बार भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्धारित तिथि पर डैम से पानी छोड़ा जाएगा या नहीं। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए किसानों में इस बात को लेकर भरोसा भी देखा जा रहा है कि पानी तय समय पर छोड़ा जाएगा।
किसानों का मानना है कि वर्तमान में डैम में पानी की उपलब्धता संतोषजनक बनी हुई है और मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय से पहले सक्रिय होने की संभावना है। इसी वजह से उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष 12 जून को ही डेल्टा सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जा सकता है।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार मेट्टूर डैम में जल स्तर 79.35 फीट दर्ज किया गया है, जबकि पानी का भंडारण 41.31 टीएमसी बताया गया है। सामान्य तौर पर डैम का जल स्तर 90 फीट तक पहुंचने पर पानी छोड़ा जाता है, लेकिन कई बार परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव भी किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में डैम में पानी के प्रवाह में बढ़ोतरी की संभावना है, जिससे स्थिति और बेहतर हो सकती है।
डेल्टा क्षेत्र के किसानों के लिए यह जल आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इन जिलों में लगभग 16.06 लाख एकड़ भूमि पर कुरुवई, सांबा और थलाडी जैसी तीन प्रमुख फसलों की खेती की जाती है। इन फसलों के लिए लगभग 230 दिनों की अवधि में करीब 330 टीएमसी पानी की आवश्यकता होती है, जो मेट्टूर डैम से ही पूरी होती है।
इतिहास पर नजर डालें तो पिछले 91 वर्षों में मेट्टूर डैम से केवल 20 बार ही 12 जून को तय समय पर पानी छोड़ा गया है। इसके अलावा कई वर्षों में जल स्तर कम होने या मानसून में देरी के कारण निर्धारित तिथि पर पानी नहीं छोड़ा जा सका। लगभग 60 वर्षों में अलग-अलग परिस्थितियों के कारण पानी छोड़ने की तारीखों में बदलाव देखने को मिला है।
इस बार किसानों ने मौसम विभाग के पूर्वानुमान को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय पर शुरू होने की संभावना के चलते किसानों ने खेतों की तैयारी भी शुरू कर दी है। कई जगहों पर किसान यह मानकर जुताई और अन्य प्रारंभिक कार्य कर रहे हैं कि 12 जून को मेट्टूर डैम से पानी छोड़ा जाएगा।
स्थानीय कृषि संगठनों का कहना है कि यदि मानसून सामान्य रहता है और डैम में पानी का प्रवाह बढ़ता है तो इस वर्ष सिंचाई व्यवस्था सुचारू रूप से चल सकती है। इससे डेल्टा क्षेत्र में कृषि उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
फिलहाल सभी की निगाहें मौसम विभाग की आगामी रिपोर्ट और डैम में पानी के स्तर पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि इस वर्ष 12 जून को मेट्टूर डैम से पानी छोड़ा जाएगा या नहीं।